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नोएडा में यादव सिंह केबलिंग स्कैम में 3 अधिकारियों की विभागीय जांच तेज, टेक्निकल सपोर्ट से खुलेंगे कई राज

deltin33 1 hour(s) ago views 635
  

केबलिंग घोटाले में तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच तेज। फोटो: आर्काइव



जागरण संवाददाता, नोएडा। यादव सिंह प्रकरण से जुड़े अंडरग्राउंड केबलिंग घोटाले में नोएडा प्राधिकरण ने तीन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच तेज हो गई है। प्राधिकरण स्तर पर गठित जांच अधिकारी अब मामले के तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए टेक्निकल सपोर्ट की मांग की हैं।

यह सपोर्ट फाइलिंग से लेकर ग्राउंड पर हुए कार्यों की बारीकियों को समझने में मदद करेगा, ताकि नामित अधिकारियों की भूमिका और संभावित अनियमितताओं का पूरा चित्र सामने आ सके। जांच अधिकारी इस प्रकरण में टेक्निकल सपोर्ट की औपचारिक मांग करेंगे। यह सपोर्ट अंडरग्राउंड केबलिंग कार्यों के टेंडर, निष्पादन, गुणवत्ता और भुगतान से जुड़े तकनीकी दस्तावेजों का विश्लेषण करेगा।
सटीक जांच के लिए चाहिए टेक्निकल इवैलुएशन

जांच टीम का मानना है कि बिना तकनीकी मूल्यांकन के अनियमितताओं की सटीक पुष्टि संभव नहीं है। इस मामले में आरपी सिंह (वर्तमान में महाप्रबंधक, जल-सीवर एवं ईएंडएम), निजामुद्दीन और प्रमोद के खिलाफ चार्जशीट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निजामुद्दीन और प्रमोद का पहले ही नोएडा से तबादला हो चुका है।

विभागीय जानकारी के मुताबिक इन अधिकारियों के नाम केंद्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट में शामिल होने के बावजूद प्राधिकरण स्तर पर विभागीय जांच शासन तक नहीं पहुंच पाई थी। शासन ने इस देरी पर कड़ी आपत्ति जताई है।
कई बार पूछा- जांच लंबित क्यों है ?

कई बार प्राधिकरण से पूछा गया कि विभागीय जांच क्यों लंबित है? अब शासन ने स्पष्ट रूप से जवाब तलब किया है। आरोप है कि जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित अधिकारियों ने पदोन्नति भी प्राप्त कर ली, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।  

बता दें कि साल 2020 में अंडरग्राउंड केबलिंग प्रकरण में पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ यादव सिंह और लगभग 20 अन्य अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी हुई थी। उस समय इन तीन अधिकारियों के नाम सूची में नहीं थे, लेकिन जांच में इनके नाम सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की दिशा बदल गई है।

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है और रिपोर्ट जल्द शासन को सौंपे जाने की तैयारी है। टेक्निकल सपोर्ट मिलने के बाद जांच की गति और सटीकता दोनों बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अधिकारियों की यादव सिंह प्रकरण में कहा और किस स्तर तक शामिल है उसकी जानकारी जल्द ही सामने आ जाएगी।

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