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फाइल फोटो।
जासं, जमशेदपुर। लौहनगरी में जिन बहुमंजिला इमारतों के पास आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाण पत्र) नहीं है, उन्हें टाटा स्टील बिजली और पानी का कनेक्शन नहीं देगी। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर आयोजित जन सुनवाई के दौरान टाटा स्टील यूआइएसएल (पावर डिस्ट्रीब्यूशन) के वरीय महाप्रबंधक वीपी सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और जिला प्रशासन व जमशेदपुर अक्षेस (जेएनएसी) के निर्देशों के कारण इन कनेक्शनों पर रोक लगाई गई है। जन सुनवाई के दौरान एक बिल्डर ने अपनी समस्या रखते हुए आरोप लगाया कि शहर में रसूखदार लोगों को पैरवी पर कनेक्शन मिल जाते हैं।
उन्होंने दो साल पहले 13 लाख रुपये जमा किए थे, फिर भी उन्हें अब तक बिजली नहीं मिली। इसके जवाब में वीपी सिंह ने कहा कि वर्तमान में लगभग 200 आवेदन सिर्फ इसलिए लंबित हैं क्योंकि उनके पास आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना प्रमाण पत्र के कनेक्शन देना झारखंड म्युनिसिपल एक्ट का उल्लंघन होगा। हाईकोर्ट ने भी अवैध रूप से निर्मित 24 बहुमंजिला इमारतों को ढहाने का आदेश दिया है, जिसे देखते हुए कंपनी पूरी सावधानी बरत रही है।
टाटा स्टील के इस कड़े रुख के बीच जन सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि यदि नियम इतने सख्त हैं, तो शहर की 125 बस्तियों में हुए अवैध निर्माणों और व्यावसायिक परिसरों को किस आधार पर कनेक्शन दिए गए। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से पहले ही यह तथ्य सामने आ चुका है कि शहर के गिने-चुने बिल्डरों के पास ही वैध सर्टिफिकेट है।
वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहर लाल शर्मा ने आयोग के समक्ष तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शहर में अतिक्रमण टाटा स्टील और अक्षेस के अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ है। जब अवैध निर्माण हो रहे थे, तब कंपनी का कानूनी और लैंड विभाग मौन क्यों था? उन्होंने जमशेदपुर अक्षेस की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े किए।
प्रशासन और कंपनी की इस सख्ती से अब उन सैकड़ों फ्लैट खरीदारों की चिंता बढ़ गई है जो अपनी जमा पूंजी लगाकर आशियाने की उम्मीद में बैठे हैं। |
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