search

80000 सैलरी लेने वाला कर्मचारी 10000 की लालच में गया जेल, औरंगाबाद DM ने क्लर्क को किया सस्पेंड

LHC0088 1 hour(s) ago views 294
  

80000 सैलरी लेने वाला कर्मचारी 10000 की लालच में गया जेल (AI Generated Image)



जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। करीब 80 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले हसपुरा अंचल के लिपिक श्लोक कुमार 10 हजार रुपये रिश्वत के लालच में जेल पहुंच गए। सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की पटना से आई टीम ने उन्हें कार्यालय में ही रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद टीम उन्हें सीधे पटना ले गई, जहां मंगलवार को न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर बेउर जेल भेज दिया गया।

कार्रवाई के बाद जिले के सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मच गया। इधर, जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लिपिक को निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जीवन निर्वहन भत्ता दिया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिश्वत लेने की शिकायत सत्यापित होने के बाद निगरानी की टीम ने जाल बिछाकर यह कार्रवाई की।

लिपिक की गिरफ्तारी के बाद अंचल कार्यालय से लेकर समाहरणालय में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित लिपिक ने अंचलाधिकारी (सीओ) के नाम पर रिश्वत की मांग की थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


लोगों का कहना है कि हसपुरा अंचल क्या किसी भी अंचल में बिना रिश्वत के दाखिल-खारिज का कार्य कराना मुश्किल माना जाता है। इस तरह की शिकायतें प्रतिदिन सामने आती है. लेकिन कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोरी बंद नहीं हो रही है।

अनुकंपा पर हुई थी बहाली

बताया गया कि गिरफ्तार लिपिक की बहाली अनुकंपा के आधार पर करीब सात वर्ष पूर्व हुई थी। स्थापना शाखा के प्रभारी पदाधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। कम समय में अच्छी-खासी वेतन पाने के बावजूद रिश्वतखोरी में संलिप्तता ने विभाग की छवि को धूमिल किया है।

विडंबना यह है कि हसपुरा अंचल लंबित मामलों के निष्पादन में राज्य स्तर पर पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। राज्य में नंबर वन रैंक लाने वाला यह अंचल अब रिश्वतखोरी के मामले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि आंकड़ों में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें कम नहीं हुई हैं।
निगरानी की दूसरी बड़ी कार्रवाई

इस वर्ष निगरानी की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 19 जनवरी को दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत जीएनएम अर्चना कुमारी से छुट्टी की स्वीकृति के लिए दो हजार रुपये रिश्वत लेते एक लिपिक को गिरफ्तार कर बेउर जेल भेजा गया था। लगातार हो रही कार्रवाई यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार पर निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं, फिर भी रिश्वतखोरी पर पूर्ण विराम नहीं लग पा रहा है।
वर्ष 2025 में भी हुई कार्रवाई

वर्ष 2025 की बात करें तो अंचलों से लेकर थाना स्तर तक कार्रवाई की गई। ओबरा अंचल के सोनहुली पंचायत के राजस्व कर्मचारी प्रमोद कुमार को 12 अगस्त 2025 को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था।

इसके महज 15 दिन बाद नगर थाना गेट के पास एक दारोगा को अधिवक्ता से 20 हजार रुपये लेते पकड़ा गया था। देव अंचल में भी रिश्वतखोरी के मामलों में राजस्व कर्मचारी और कंप्यूटर आपरेटर तक पर प्राथमिकी कराई की जा चुकी है।

लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बावजूद रिश्वतखोरी पर लगाम नहीं लग पा रही है। हर कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक दहशत का माहौल बनता है, लेकिन समय बीतते ही हालात फिर सामान्य हो जाते हैं।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
161226