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इस्तीफा स्वीकार करने में देरी पर पंजाब-हरियाणा HC का कड़ा रूख, शिक्षिका को 11 माह का वेतन व भत्ते देने का आदेश

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कैप्शन: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, पंचकूला। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) की एक शिक्षिका को बड़ी राहत देते हुए आदेश दिया है कि इस्तीफा स्वीकार करने में हुई देरी की अवधि के लिए उसे पूरा वेतन और सभी तय भत्ते दिए जाएं। जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक इस्तीफा विधिवत स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारी और नियोक्ता के बीच सेवा संबंध समाप्त नहीं माना जा सकता और कर्मचारी उस अवधि के सभी सेवा लाभों का अधिकारी रहता है।

मामले के अनुसार सोनीपत निवासी याचिकाकर्ता वर्ष 2012 में एनवीएस में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका (टीजीटी) के रूप में नियुक्त हुई थी और विभिन्न नवोदय विद्यालयों में सेवाएं दे चुकी थी। सेवा के दौरान उसने कार्यस्थल पर प्रतिकूल माहौल और यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायत भी दर्ज कराईं। मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उसने 14 फरवरी 2024 को इस्तीफा दे दिया, लेकिन विभाग ने इसे “शर्तों वाला इस्तीफा” बताते हुए स्वीकार करने में देरी की। बाद में सात जनवरी 2025 को इसे पूर्व प्रभाव से स्वीकार किया गया।
भत्ते और अन्य सेवा लाभ नहीं किए गए जारी

याचिकाकर्ता का आरोप था कि इस्तीफा लंबित रखने के बावजूद विभाग ने उस अवधि का वेतन, भत्ते तथा अन्य सेवा लाभ जारी नहीं किए, जिससे उसे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अदालत ने इस पहलू पर कहा कि यदि नियोक्ता इस्तीफा स्वीकार करने में विलंब करता है और कर्मचारी को सेवा से विधिवत मुक्त नहीं करता, तो वह उसी अवधि के वेतन और अन्य लाभों से कर्मचारी को वंचित नहीं कर सकता। प्रशासनिक देरी का नुकसान कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता।


पीठ ने अपने आदेश में कहा कि नियोक्ता किसी कर्मचारी का इस्तीफा लंबित रखकर एक ओर सेवा संबंध जारी रखें और दूसरी ओर उसी अवधि के लाभों से इंकार करें, यह विधिसंगत नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार करने का अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी के पहले से अर्जित अधिकार समाप्त कर दिए जाएं।
कई समितियां की गईं गठित

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि 14 फरवरी 2024 से सात जनवरी 2025 तक की अवधि का पूरा वेतन और सभी भत्ते चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं। हालांकि कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों पर अतिरिक्त राहत देने की मांग को अदालत ने स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि संबंधित शिकायतों की जांच के लिए विभागीय स्तर पर समितियां गठित की जा चुकी हैं और आवश्यक कार्रवाई भी की गई है।
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