पाकिस्तान को मिली हार
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण। भारत के विरुद्ध रविवार को टी-20 विश्व कप में 61 रन की करारी हार ने पाकिस्तान क्रिकेट की जड़ों को हिला दिया है। इस मुकाबले में मिली एकतरफा हार के बाद पाकिस्तान में केवल निराशा नहीं बल्कि गुस्से और हताशा का विस्फोट देखने को मिल रहा है। खिलाड़ियों की विफलता से लेकर क्रिकेट में राजनीतिक हस्तक्षेप तक, हर स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
18 को नामीबिया से मैच
पूर्व क्रिकेटर खुलकर मौजूदा टीम पर हमला बोल रहे हैं और बदलाव की मांग तेज हो गई है। इस हार से पाकिस्तान की सुपर-8 में पहुंचने की उम्मीदों पर भी खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान का नेट रनरेट अमेरिका से भी कम है और अब 18 फरवरी को नामीबिया के विरुद्ध मुकाबला करो या मरो जैसा होगा।
बाबर आजम का नहीं चला बल्ला
कोलंबो में खेले गए मुकाबले में पाकिस्तान की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही बुरी तरह फ्लॉप रही। पूर्व कप्तान बाबर आजम सिर्फ पांच रन बनाकर आउट हो गए, जबकि तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी ने दो ओवर में 31 रन लुटा दिए। हार के बाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि फैसला उनके हाथ में होता तो बाबर, शादाब खान और शाहीन को तुरंत टीम से बाहर कर देते। अब समय आ गया है जब युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए।
दबाव झेलने की क्षमता नहीं
जावेद मियांदाद ने भी खिलाड़ियों के चरित्र पर सवाल उठाए और कहा कि बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने की क्षमता ही असली पहचान होती है, जो इस टीम में नजर नहीं आई। पूर्व कप्तान मोहम्मद यूसुफ ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा कि बाबर, शाहीन और शादाब का समय खत्म हो चुका है और पाकिस्तान को अब केवल नाम नहीं, बल्कि मैच जिताने वाले खिलाड़ी चाहिए।
तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी खुद को सुपरस्टार समझते हैं, लेकिन मैदान पर उनका प्रदर्शन साधारण से भी नीचे है। पूर्व कप्तान मोइन खान ने स्वीकार किया कि मौजूदा समय में हर प्रारूप में भारत पाकिस्तान से बेहतर टीम है। इस बीच, पीसीबी में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी तेज हो गए हैं।
मोहम्मद यूसुफ ने पीसीबी चेयरमैन व गृहमंत्री मोहसिन नकवी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जब तक क्रिकेट से राजनीति और निजी एजेंडा दूर नहीं होगा, तब तक पाकिस्तान अपने पुराने गौरव को हासिल नहीं कर सकता। नकवी के एशिया कप ट्रॉफी विवाद और भारत मैच के संभावित बहिष्कार जैसे फैसलों ने पहले ही विवाद खड़ा किया था।
अब इस हार ने पाकिस्तान क्रिकेट में आत्ममंथन की जरूरत को और गहरा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि चयन और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो पाकिस्तान क्रिकेट का पतन और गहरा सकता है।
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