धार की ऐतिहासिक भोजशाला (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, इंदौर। भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी। अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 98 दिन की सर्वे रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत नहीं हो पाई।
दोपहर बाद न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने आदेश जारी करते हुए भोजशाला से जुड़ी सभी याचिकाओं को आगे की प्रक्रिया के लिए मुख्य न्यायाधीश, जबलपुर के समक्ष भेज दिया। अब यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश करेंगे कि मामले की सुनवाई वे स्वयं करेंगे या किसी वरिष्ठतम न्यायाधीश को नामित करेंगे।
18 फरवरी को अगली सुनवाई
मामले की अगली तारीख 18 फरवरी निर्धारित की गई है। फिलहाल इस प्रकरण से संबंधित चार अलग-अलग याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं। उल्लेखनीय है कि 11 मार्च 2024 को हाई कोर्ट ने एएसआई को वैज्ञानिक पद्धति से भोजशाला परिसर का विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
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98 दिन चला था सर्वे
एएसआई ने लगभग 98 दिनों तक सर्वेक्षण कार्य कर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंप दी थी। इसी बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 22 जनवरी को निर्देश दिए गए कि हाई कोर्ट तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई दोबारा शुरू करे। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सुनवाई मुख्य न्यायाधीश स्वयं करें या वे इसके लिए वरिष्ठतम न्यायाधीश को अधिकृत करें।
रिपोर्ट दोनों पक्षों को मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एएसआई की सर्वे रिपोर्ट दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जानी है। ऐसे में सोमवार की सुनवाई में रिपोर्ट सार्वजनिक होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन कार्यवाही स्थगित होने से यह प्रक्रिया भी फिलहाल टल गई है।
अब निगाहें मुख्य न्यायाधीश के निर्णय पर टिकी हैं कि आगे की सुनवाई इंदौर खंडपीठ में होगी या मामला जबलपुर स्थानांतरित किया जाएगा। |
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