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साइबर क्राइम (प्रतीकात्मक चित्र)
राज्य ब्यूरो, भोपाल। साइबर ठगी के जाल की जटिलता का बड़ा खुलासा भोपाल में सामने आया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 70 वर्षीय बुजुर्ग से 70 लाख रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने चार राज्यों से पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है, लेकिन गिरोह का सरगना अब भी कंबोडिया में बैठा बताया जा रहा है।
चार राज्यों में फैला नेटवर्क
स्टेट साइबर सेल ने चेन्नई (तमिलनाडु), चंडीगढ़, असम और गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से पांच आरोपितों को दबोचा है। पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी सीधे ठगी नहीं करते थे, बल्कि ‘म्यूल अकाउंट’ (किराये के बैंक खाते) उपलब्ध कराते या ओटीपी हासिल करने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह का मास्टरमाइंड कंबोडिया में बैठा है, जिससे संपर्क केवल Telegram ऐप के जरिए होता था। कमीशन काटकर बाकी रकम विदेश भेज दी जाती थी।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
17 नवंबर 2025 को साइबर ठगों ने खुद को आतंकवाद निरोधी दस्ते का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में लेने का झांसा दिया। भय और दबाव बनाकर उनसे 70 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। पुलिस 5.54 लाख रुपये होल्ड कराने में सफल रही।
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जांच में सामने आया कि जिस नंबर से WhatsApp कॉल कर वारदात को अंजाम दिया गया, वह असम का था। ठगी की रकम असम, गोरखपुर और चेन्नई के खातों में ट्रांसफर की गई।
ओटीपी से विदेश तक रकम ट्रांसफर
असम के एक आरोपित ने खुलासा किया कि चंडीगढ़ में उसकी टीम खाताधारकों से रकम निकलवाने और आगे ट्रांसफर कराने का काम करती थी। वह खुद कई सिम और मोबाइल के जरिए ओटीपी हासिल कर टीम को भेजता था, जिससे रकम कंबोडिया पहुंचती थी। इसके एवज में उसे 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
चुनौती बनी तकनीकी गुमनामी
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आरोपित सीधे संपर्क से बचते हैं और सिर्फ एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संवाद करते हैं। विदेशी सर्वर और इंटरनेट कॉलिंग के कारण मुख्य सरगना तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
मध्य प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों के लिए भी यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गंभीर चुनौती को उजागर करता है। पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से सरगना तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। |
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