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दिल्ली में अब घर बैठे होगी जमीन की पहचान, दस्तावेज के लिए सरकारी दफ्तरों के नहीं लगाने होंगे चक्कर

deltin33 Yesterday 17:56 views 61
  

सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद रेखा गुप्ता सरकार ने इसे पूरी दिल्ली में लागू करने का फैसला लिया। ( दिल्ली सीएम की फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। भूमि के पारदर्शी प्रबंधन के लिए दिल्ली में प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों की विशिष्ट भूखंड पहचान संख्या दी जाएगी। इससे भूमि को लेकर होने वाले विवाद और धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। यह कदम केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआइएलआरएमपी) के अंतर्गत उठाए गए हैं।
हर भूखंड को मिलेगा 14 अंकों का ULPIN

वर्ष 2016 में इसे शुरू किया गया था, लेकिन पूर्व की आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे दिल्ली में लागू नहीं किया था। पश्चिमी जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में इसका सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद रेखा गुप्ता सरकार ने इसे पूरी दिल्ली में लागू करने का निर्णय लिया है। पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 274 यूएलपीआइएन रिकॉर्ड सफलतापूर्वक तैयार किए गए हैं।
यह भूमि विवाद विरुद्ध मजबूत डिजिटल हथियार- रेखा गुप्ता

14 अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआइएन) मिलने से जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह केवल नंबर नहीं बल्कि भूमि विवाद और गड़बड़ियों के विरुद्ध मजबूत डिजिटल हथियार है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम और क्रांतिकारी प्रयास है।

इस प्रणाली को भू आधार भी कहा जाता है। इस व्यवस्था से जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसे लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की आइटी शाखा को सौंपा गया है, जो भारतीय सर्वेक्षण विभाग से भी सहयोग प्राप्त करेगी।
नागरिकों को क्या लाभ मिलेगा?

इस प्रक्रिया में भूमि की जियो रिफरेंसिंग उपलब्ध होगी जिससे उसकी सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों को न्यूनतम किया जा सकेगा। यह विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि से संबंधित आंकड़ों के समन्वय में मदद करेगा और धोखाधड़ी वाले लेन-देन तथा बहु पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगाएगा।

नागरिकों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें अपनी जमीन की पहचान के लिए कई दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एक ही नंबर से जमीन की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग से करीब 2 टेराबाइट का हाई-क्वालिटी भू-स्थानिक आंकड़े और ड्रोन से ली गई विशेष तस्वीरें ली जा रही हैं। ड्रोन सर्वे और हाई रिजाल्यूशन वाली तस्वीरों से दिल्ली का नया डिजिटल लैंड मैप तैयार हो जाएगा।
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