मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो
विकास गुसाईं, देहरादून। राज्य में हड़ताल, बंद, दंगा और उग्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब कड़ी आर्थिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। गृह विभाग ने ऐसी घटनाओं में क्षतिपूर्ति वसूली के लिए विस्तृत नियमावली तैयार कर ली है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई सीधे जिम्मेदार व्यक्तियों से की जाएगी, जिससे सरकारी और निजी संपत्तियों की तोडफ़ोड़ पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
प्रदेश सरकार ने दो वर्ष पहले गैरसैंण में उत्तराखंड लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पारित किया था। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद यह एक्ट बन चुका है। अब इसे लागू करने के लिए इसकी नियमावली भी तैयार हो चुकी है। स्पष्ट किया गया है कि जिस संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, उसकी गणना बाजार भाव से की जाएगी। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु होती है तो दंगाइयों पर कानूनी धाराएं तो लगेंगी ही, उन्हें मृतक आश्रितों को सात लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देनी होगी। निशक्तता की स्थिति में यह राशि दो लाख रुपये रहेगी। यद्यपि, इसके लिए प्रभावितों को दावा अधिकरणों में जाना होगा।
नियमावली में यह स्पष्ट किया गया है कि हर हड़ताल, दंगे अथवा प्रदर्शन की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी, जो साक्ष्य का कार्य करेगी। साथ ही इसमें दावा अधिकरणों में किस स्तर के अधिकारियों की तैनाती होगी, इसका विस्तृत उल्लेख किया गया है।
यह भी बताया गया कि कि संपत्ति के नुकसान की गणना प्रचलित बाजार मूल्य के आधार पर की जाएगी। इस गणना के लिए भी एक समिति का गठन किया जाएगा। इसके लिए अधिकृत अधिकारी या समिति घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित आरोपितों को नोटिस जारी किया जाएगा और निर्धारित समय सीमा में राशि जमा न करने की स्थिति में राजस्व वसूली की कार्रवाई भी की जा सकेगी। सचिव गृह शैलेश बगौली ने बताया कि नियमावली बन चुकी है। इसे जल्द ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। |