जागरण संवाददाता, झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक किन्नर ने गरीब बेटी की शादी में दिल खोलकर खर्चा किया और शादी के खर्च का जिम्मा उठाया। किन्नर चांदनी के सराहनीय कार्य की क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
जिले के खैलार कस्बे के सुभाषनगर में इस विवाह को जिसने देखा और सुना, वह दिल से न केवल ऐसे किन्नर को आशीष देता नजर आया, बल्कि यह कहते देखा गया कि किन्नर के भी दिल होते हैं। चांदनी ने गरीब कन्या की शादी में पिता की भूमिका निभाते हुए दिल खोलकर धन खर्च किया तो मण्डप के नीचे बैठकर बेटी के हाथ भी पीले किये।
माँ का धर्म निभाते समय आए भाव और श्रद्धा को देखने के बाद लोगों की वह धारणा टूटती नजर आई, जिनकी नजरों में किसी किन्नर का किरदार केवल शादी और जन्म के समय शगुन के नाम पर लोगों को \“लूटने\“ लेने के लिये आना होता है।
ताली बजाकर नहीं, हाथ जोड़कर किया स्वागत
खैलार के सुभाषनगर में जालौन जिले से एक रायकवार परिवार के यहाँ बरात आई। नृत्य करते-करते थक चुके बराती जब पंडाल के अंदर जा रहे थे तो गेट के ही पास हाथ जोड़े खड़े किन्नर उनका स्वागत कर रहे थे। कोई पानी का इंतजाम करता नजर आ रहा था तो कोई स्टॉल पर भोजन की व्यवस्था को देख रहा था।
यही नहीं, क्षेत्र की किन्नर चाँदनी और उसकी चेला मुस्कान दूल्हा और उसके परिजनों का जिस तरह से ख्याल रखती नजर आ रही थी, उसे देखकर हर कोई हर्षित दिखा। चाँदनी ठीक इस तरह पेश आ रही थी जैसे वह वधू की माँ हो और उसने माँ के सभी दायित्वों का भली भाँति निर्वहन भी किया।
गरीब बेटी को देखकर पहले बना लिया था मन
शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर खैलार स्थित सुभाष नगर में चाँदनी किन्नर रहती हैं। अन्य किन्नरों की तरह वह भी अपने चेलों के साथ शादी और जन्मदिन पर शगुन लेने जाती हैं। यहीं एक रायकवार परिवार रहता है। माँ घरों में झाड़ू-पोंछा का कार्य करती है।
इस परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक होने और जवान बेटी के घर में होने के कारण सुनीता परेशान रहा करती थी। यह हालत देखकर चाँदनी ने अपने चेला मुस्कान के साथ चर्चा की और बेटी के विवाह का जिम्मा उठाने का निर्णय लिया। शादी तय होने के बाद चाँदनी अपनी पूरी टीम के साथ सक्रिय हो गई।
गुरुवार की रात जब बरात आई, तो उन्होंने निर्धन बेटी चंचल की न सिर्फ विवाह कराया, बल्कि माँ होने का पूरा दर्ज अदा करते हुए उसका कन्यादान भी किया। चाँदनी ने बरात की भव्य तरीके से अगुवानी करते हुये उनका खूब सत्कार किया। दहेज स्वरूप उपहार भी भेंट किए। |
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