राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत कोर्स कोआर्डिनेटर पदों की चयन प्रक्रिया मे संयुक्त निदेशक के निलंबन के साथ ही विवेचना की आंच वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है। जांच टीम मान रही है कि वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर घोटाला नहीं हो सकता था।
कोचिंगों में आउटसोर्सिंग पर नियुक्त किए गए कोर्स कोआर्डिनेटरों की योग्यता से समझौता किया गया। ऐसे लोगों को नियुक्त किया गया जो कभी पीएसएस मुख्य परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। जांच में पता चला कि 69 अभ्यर्थियों में से 48 अपात्र थे। मंत्री असीम अरुण ने संयुक्त निदेशक सुनील कुमार बिसेन को निलंबित कर दिया।
कोर्स कोआर्डिनेटर पर भर्ती अपात्र प्रति माह 60 हजार रुपये वेतन लेते थे। दो साल से करीब सात करोड़ रुपये वेतन ले चुके हैं, जिसकी रिकवरी होगी। आउटसोर्सिंग कंपनी अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ और भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेश भर में संचालित कोचिंग में आउटसोर्सिंग पर लगे कोर्स कोार्डिनेटरों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की एक गोपनीय शिकायत अक्टूबर 2025 को समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को मिली थी। जांच कराने पर पता चला कि अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों का मूल अभिलेख ठीक से सत्यापित नहीं किया गया था।
इंटरव्यू और चयन से जुड़े जरूरी दस्तावेज विभागीय पत्रावली में उपलब्ध नहीं थे। चयन प्रक्रिया की निगरानी के लिए गठित समितियों द्वारा साक्षात्कार व सत्यापन कराए जाने का कोई रिकार्ड नहीं मिला।
संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर चयन की संस्तुति की गई, जिससे योजना की पारदर्शिता प्रभावित हुई। असीम अरुण ने कहा कि विभाग में किसी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार नहीं चलेगा। दोषियों को सजा मिलनी ही है। |