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बिजली नहीं, भाप से चलती थी दुनिया की पहली लिफ्ट; न्यूयॉर्क में 169 साल पहले हुई थी शुरुआत

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कब बनी थी दुनिया की पहली लिफ्ट? (Picture Courtesy: Instagram)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में आसमान छूती इमारतों के बीच लिफ्ट हमारे जीवन का एक सामान्य हिस्सा बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पहली बार जब कोई लिफ्ट चली होगी, तो वह कैसी दिखती होगी? बता दें कि दुनिया की पहली कमर्शियल लिफ्ट की कहानी तकनीकी स्किल और साहस की कहानी है। आइए जानें कब और कैसे बनी थी दुनिया की पहली कमर्शियल लिफ्ट।  
न्यूयॉर्क का वह ऐतिहासिक दिन

23 मार्च 1857 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में इतिहास रचा गया। यहां ब्रॉडवे स्थित ई.वी. हॉगवॉट डिपार्टमेंट स्टोर में दुनिया की पहली पैसेंजर लिफ्ट की शुरुआत हुई। उस समय इसे तैयार करने में लगभग 2,500 डॉलर की लागत आई थी। यह सिर्फ एक मशीन नहीं थी, बल्कि शहरी जीवन के भविष्य को बदलने वाली एक क्रांतिकारी शुरुआत थी।

  

(Picture Courtesy: Instagram)
भाप के इंजन से मिलता था पावर

आज की लिफ्ट बिजली से चलती हैं, लेकिन 1857 की वह पहली कमर्शियल लिफ्ट भाप से चलने वाले इंजन से चलती थी। इस विशाल इंजन को इमारत के बेसमेंट में लगाया गया था। तकनीकी खासियत की बात करें, तो यह लिफ्ट हर मिनट लगभग 40 फीट की रफ्तार से ऊपर-नीचे चलती थी। भले ही आज की तुलना में यह गति धीमी लगे, लेकिन उस दौर के लिए यह एक चमत्कार से कम नहीं था।
सुरक्षा का अनोखा इंतजाम

उस समय लोगों के मन में सबसे बड़ा डर यह होता था कि अगर लिफ्ट की केबल टूट गई तो क्या होगा? इस डर को खत्म करने के लिए इसमें एक स्पेशल रैचेट सेफ्टी लॉक लगाया गया था। इस तकनीक की खासियत यह थी कि अगर किसी कारण से लिफ्ट की केबल टूट भी जाती, तो यह सुरक्षा लॉक तुरंत एक्टिव हो जाता और लिफ्ट को उसी जगह थाम लेता। इस सुरक्षा तंत्र ने लोगों को ऊंचाइयों पर जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया और लिफ्ट के गिरने के खतरे को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
आसमान छूती इमारतों की नींव बनी यह लिफ्ट

इस सुरक्षित लिफ्ट के आने से पहले इमारतों की ऊंचाई सीमित हुआ करती थी, क्योंकि सीढ़ियों से बहुत ऊपर जाना थकान भरा और कठिन काम था। लेकिन इस आविष्कार ने भविष्य की ऊंची इमारतों और स्काईस्क्रेपर्स के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। इसके बाद से ऊंची मंजिलों पर जाना आसान और सुरक्षित हो गया, जिसने शहरों की रूपरेखा ही बदल दी। यह भी पढ़ें- 217 साल पहले हुआ था स्टीमबोट का आविष्कार; 4 दिन का सफर महज 32 घंटों में पूरा कर रचा था इतिहास   यह भी पढ़ें- बेल्जियम में आज भी चालू है 100 साल पुराना लकड़ी का एस्केलेटर, सजावट के लिए हुआ है पीतल का इस्तेमाल
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