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विधानसभा के दौरान सदन में प्रश्न का जबाव देते भूमि सुधार राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा। सौ : वीडियो ग्रैब।
राज्य ब्यूरो, पटना। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा में कहा कि 24 नवंबर 2025 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। तब से विभागीय अफसरों के सहयोग भूमि विवाद से संबंधित मामलों का निष्पादन हेतु महाअभियान शुरू किया।
जनसंवाद, डिजिटल व्यवस्था और सख्ती के कारण भूमि से जुड़े लंबित मामलों में कमी आई है। अब तक 40 लाख किसानों के आवेदनों का परिमार्जन एवं दाखिल खारिज के मामलों को निष्पादन किया जा चुका है। उन्होंने 31 मार्च 2031 तक
भूमि से संबंधित 46 लाख आवेदनों का निष्पादन करने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने यह कहा कि राज्य में भूमि सुधार जनकल्याण संवाद अब जिलावार आयोजित होगा जिसमें जिलाधिकारी और प्रमंडलीय आयुक्त शामिल होंगे।
उन्होंने यह बात राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का नये वित्तीय वर्ष 206-27 के लिए पेश बजट पर चर्चा के उपरांत सरकार के तरफ से उत्तर देते हुए कही। हालांकि, सरकार के उत्तर से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने बहिष्कार किया।
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ का असर राज्य में दिखाई देने लगा है और अब इसे प्रमंडल स्तर से आगे बढ़ाकर जिलावार आयोजित किया जाएगा। 12 दिसंबर 2025 से प्रमंडलवार शुरू हुआ ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ अब जिलावार आयोजित किया जाएगा। इसमें तीन प्रमुख समस्याओं—दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन मापी—को लक्षित कर मौके पर समाधान कराया जा रहा है और समान प्रकृति की समस्याओं के लिए दिशा-निर्देश तय किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आनलाइन दाखिल-खारिज निष्पादन 75 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है, जबकि लंबित मामलों का अनुपात 25 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत पर आ गया है। वहीं परिमार्जन प्लस का निष्पादन 10 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विवाद-रहित दाखिल-खारिज के लिए 14 दिन की समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लायी जा रही है।
उन्होंने कहा कि जनसंवाद, डिजिटल व्यवस्था और सख्ती के कारण भूमि से जुड़े लंबित मामलों में कमी आई है। भूमि संबंधी प्रक्रियाएं कानून की जटिलता, प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं और समाज के भावनात्मक जुड़ाव से प्रभावित होती हैं, इसलिए सरकार ने बिचौलियों और भूमाफियाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनायी है। डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका को सीमित किया गया है। अब कानून-व्यवस्था की स्थिति बनने पर या राजस्व अधिकारी के अनुरोध पर ही पुलिस दखल देगी। जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए अब थानों के बजाय अंचल कार्यालयों में कैंप लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए प्रत्येक जिले में भूमि बैंक बनाने का निर्णय लिया गया है और इसके लिए सरकारी जमीन की पहचान तेज कर दी गई है। भूमि विवादों का बड़ा कारण जाली दस्तावेज हैं, इसलिए ऐसे मामलों में अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों को सौंपी गई है।
राज्य के अधिकांश भूमि अभिलेख 1890–1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे काल के हैं। 1958 में शुरू हुआ रीविजनल सर्वे 1975 में रुक गया था। अब सटीक, सरल और समयबद्ध भूमि सर्वे की दिशा में राजस्व महाभियान को गति दी गई है। 31 मार्च 2026 तक 46 लाख लंबित आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 34 लाख से अधिक दस्तावेज स्कैन किए जा चुके हैं। |
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