तुर्कमान गेट अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पथराव मामले में गिरफ्तार 12 आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित। जागरण
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। तीस हजारी एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने अतिक्रमण विरोधी मुहिम के दौरान तुर्कमान गेट पर पथराव की घटना में गिरफ्तार 12 आरोपियों की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह घटना 6 जनवरी की रात को हुई थी, जब चांदनी महल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। एडिशनल सेशंस जज भूपिंदर सिंह ने आरोपियों के वकीलों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट 16 फरवरी को अपना फैसला सुना सकता है।
जिन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर कोर्ट ने सुनवाई की, उनमें मोहम्मद इमरान, मोहम्मद अदनान, अदनान, मोहम्मद नावेद, मोहम्मद उबैदुल्ला, आमिर हमजा, मोहम्मद आदिल, समीर हुसैन, मोहम्मद अतहर, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ और मोहम्मद अरीब शामिल थे।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि ज्यादातर आरोपी घटनास्थल के आसपास के रहने वाले हैं, इसलिए उनके मोबाइल फोन की लोकेशन फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास होना स्वाभाविक है। वकीलों ने दलील दी कि आरोपी अपने रिश्तेदारों की तलाश में वहां गए थे और पथराव में उनके शामिल होने का कोई CCTV सबूत नहीं है।
एक आरोपी ने यह भी दलील दी कि उसने अपने मोबाइल फोन पर मिले भड़काऊ मैसेज नहीं बनाए थे, बल्कि उन्हें सिर्फ फॉरवर्ड किया था। बचाव पक्ष ने इंडियन पीनल कोड की धारा 307 (हत्या की कोशिश) लगाने को भी बहुत ज़्यादा बताया, और कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी घायल को जानलेवा चोट लगने की बात सामने नहीं आई।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया। प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई थी, और आरोपियों ने पुलिस अधिकारियों पर पथराव करके कानून-व्यवस्था पर हमला किया था। पुलिस ने सबूत के तौर पर WhatsApp मैसेज और वीडियो का हवाला दिया।
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