शोएब और मुख्तार अंसारी की फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। चार फरवरी 1999 की शाम राजभवन के ठीक सामने गेट पर ऐसी दुस्साहसिक घटना घटी, जिसने यूपी की कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था। हथियारों से लैस बदमाशों ने राजभवन के सामने ही सरकारी जीप से जा रहे जेलर आरके तिवारी की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी। बदमाशों ने जिस समय जेलर की हत्या की उस वक्त वह डीएम आवास पर बैठक कर आलमबाग रोड स्थित जिला कारागार वापस जा रहे थे।
इस जघन्य हत्याकांड में शोएब उर्फ बॉबी को मुख्तार अंसारी और गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह सहित 23 लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी को बरी कर दिया था।
हत्याकांड के बाद जरायम की दुनिया में बॉबी का नाम तेजी से उभरा। दरअसल, जिस समय जेलर की हत्या की गई जेल में मुख्तार और अभय सिंह सहित कई चर्चित चेहरे बंद थे। जेलर आरके तिवारी की हत्या इसीलिए अंजाम दी गई, क्योंकि जेल में सख्ती के कारण मुख्तार और उसके गैंग की मनमानी नहीं चल पा रही थी। जेलर हत्याकांड से पहले शोएब लखनऊ विश्वविद्यालय में उस समय छात्र राजनीति करने वाले कई नेताओं के संपर्क में था।
सूत्राें का कहना है कि इसी दौरान बॉबी का संपर्क मुख्तार से भी हुआ और धीरे-धीरे उसे अपना हीरो बताने लगा। बॉबी अक्सर मुख्तार के साथ जेल से लेकर कचहरी में नजर आता था। यही वजह थी कि लोग जमीनों और ठेकों के विवाद निपटाने के लिए बॉबी के जरिए मुख्तार से मिलने लगे। यह वह दौर था जब मुख्तार से अभय सिंह की भी करीबियां बढ़ रही थीं और विवि से निकले कई छात्र नेता भी जरायम की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके थे।
सूत्रों का कहना है कि जेल में ही आरके तिवारी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई हत्याकांड में बॉबी को मुख्य आरोपी बनाया गया, लेकिन बरी हो गया। इसके बाद मुख्तार अंसारी और बाहुबली विधायक की शह पर विवादित जमीनों को कम दामों में खरीदकर कब्जा करने लगा। लखनऊ के एक प्रतिष्ठित राज परिवार से ताल्लुक रखने वाला दबंग भी बॉबी के साथ लखनऊ और बाराबंकी में विवादित जमीनों की खरीद फरोख्त में लिप्त था।
जरायम की दुनिया से खुद को दूर दिखाने के लिए बॉबी वकालत भी करने लगा लगा। जमीनों को लेकर बॉबी का कई लोगों से विवाद भी चल रहा था। मुख्तार से करीबियों के कारण ही एसटीएफ की नजर भी बॉबी की गतिविधियों पर रहती थी। |
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