प्रतीकात्मक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। प्रदेश में चारधाम यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए अनिवार्य ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को अब ऑनलाइन किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने पारदर्शिता, सुगमता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरू करने का निर्णय लिया है।
नई प्रणाली लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन, शुल्क भुगतान, टैक्स सत्यापन और वैधता की जांच ऑनलाइन माध्यम से ही संपन्न होगी। यहां तक कि एसएमएस व व्हाट्सएप पर मिले लिंक से वह ग्रीन कार्ड को प्रिंट भी कर सकेंगे।
प्रदेश में हर वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान बाहर से आने वाले व्यावसायिक वाहनों को ग्रीन कार्ड लेना जरूरी होता है। ग्रीन कार्ड में यह देखा जाता है कि वाहन के कागजात पूरे हैं या नहीं और वाहन तकनीकी रूप से फीट है या नहीं। वाहन स्वामी ने सभी निर्धारित शुल्क जमा कराया है अथवा नहीं।
ग्रीन कार्ड के लिए अब वाहन स्वामी निर्धारित पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। इसका निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए अब उन्हें बैकिंग के जरिये नहीं बल्कि क्यूआर कोड के जरिये करने की भी सुविधा मिलेगी। साथ ही वाहन के परमिट, टैक्स जमा स्थिति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की वैधता का परीक्षण भी आनलाइन किया जा सकेगा। इससे फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।
यद्यपि, व्यवस्था यह की गई है कि वाहन की तकनीकी फिटनेस और भौतिक सत्यापन के लिए संबंधित वाहन को पहली बार परिवहन कार्यालय में आना होगा।
दूसरे राज्यों के वाहनों के ग्रीन कार्ड पर रहेगी नजर
विभाग दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के ग्रीन कार्ड पर भी नजर रखेगा। दरअसल, यह बातें सामने आई हैं कि दूसरे राज्यों के व्यावसायिक वाहन उत्तराखंड आकर यहां से चारधाम के लिए सवारियां उठाते हैं। इससे स्थानीय व्यवसायियों का कारोबार प्रभावित होता है।
इसे देखते हुए यात्रा चेकपोस्टों पर यह देखा जाएगा कि यह देखा जाएगा कि इन वाहनों का ग्रीन कार्ड किस दिन बना है। साथ ही वाहन के राज्य में प्रवेश करने के दौरान कटे ग्रीन सेस की तिथि भी देखी जाएगी। इससे अवैध संचालन पर भी रोक लग सकेगी।
ग्रीन कार्ड व्यवस्था में इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं। इस बार ऑल इंडिया टैक्स को ऑनलाइन देखने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही एसएमएस व व्हाट्सएप के माध्यम से मिले लिंक से भी ग्रीन कार्ड का प्रिंट लिया जा सकता है। इस बार क्यूआर कोड से शुल्क लेने की व्यवस्था भी की जा रही है।
एसके सिंह, अपर परिवहन आयुक्त। |
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