हर जिले में बनेंगे सौ-सौ बेड के नए कैंसर अस्पताल
संतोष शुक्ल, जागरण लखनऊ। कैंसर के चंगुल और महंगे इलाज से बचाने के लिए प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। लखनऊ स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान को नोडल एजेंसी बनाकर सभी 18 मंडलों में टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर बनाने की योजना है, वहीं अगले चरण में सभी जिलों में 100-100 बेड का सेकंडरी कैंसर केयर अस्पताल बनाया जाएगा।
जिला अस्पतालों में चार-चार बेड के डे-केयर सेंटर होंगे। शासन ने राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसमें एसजीपीजीआई, केजीएमयू, आरएमएल इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं। ये अस्पताल वायबिलिटी गैप एनालसिस व पीपीपी मॉडल पर बनाए जाएंगे। शासन ने एक रिसर्च टीम गठित की है जो ये बताएगी कि प्रदेश के किस क्षेत्र में किस प्रकार का कैंसर ज्यादा फैल रहा है।
हर जिले में कैंसर अस्पताल बनाने के लिए गठित राज्य कमेटी में कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट, डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के मेडिकल आंकोलोजिस्ट डॉ. सक्षम, एसजीपीजीआई के रेडिएशन आंकोलोजिस्ट डॉ. शालीन कुमार, केजीएमयू के सर्जिकल आंकोलोजिस्ट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार, नेशनल हेल्थ मिशन के जीएम डॉ. आरएस यादव, डीजीएम डॉ. नीतू शुक्ला एवं स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. अलका शर्मा शामिल हैं।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित घोष ने बजट के अगले दिन गुरुवार को विशेषज्ञों के साथ मीटिंग कर प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय की। शासन का पहला प्रयास यह होगा कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों की आंकोलोजी यूनिट को ही अपग्रेड कर कैंसर टर्शियरी केयर सेंटर बनाया जाए, इससे जहां खर्च कम होगा वहीं एक ही परिसर में विभिन्न प्रकार की जांचें एवं डाइग्नोसिस हो सकेगी।
जिन मंडलों में राजकीय मेडिकल कॉलेज नहीं होगा, वहां नए सिरे से कैंसर सुपरस्पेशयलिटी सेंटर बनाया जाएगा। न्यूनतम रेडिएशन वाली रेडियोथेरपी के लिए लीनियर एक्सलरेटर, पीईटी स्कैन, साइबर नाइफ, इम्युनोथेरपी, मालीक्यूलर मेडिसिन, जेनेटिक कोडिंग समेत अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
दूसरे चरण में सभी जिलों में सेकंडरी यानी द्वितीयक चिकित्सा केंद्र के रूप में कैंसर अस्पताल खोले जाएंगे, जहां मरीजों की रेडियोथेरपी, कीमोथेरपी एवं सामान्य आपरेशन किए जा सकेंगे। तीसरी श्रेणी कैंसर डे-केयर सेंटर के रूप में होगी, जहां चार बेड होंगे। यहां मरीजों को भर्ती कर सुपरस्पेशियलिटी सेंटर के चिकित्सकों से परामर्श लेकर दवाएं जारी रखी जाएंगी।
डॉ. एमएसबी भट्ट ने बताया कि मैनपुरी एवं कानपुर की तरफ ओरल कैंसर ज्यादा है। गंगा के मैदान में गाल ब्लैडर कैंसर तेजी से बढ़ रहा। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में बच्चेदानी के मुंह का कैंसर, वहीं शहरी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादा केस हैं। आहारनली के कैंसर का ग्राफ भी चिंताजनक है।
उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि हर मंडल पर एक कैंसर सुपरस्पेशयलिटी सेंटर बनेगा, लेकिन लखनऊ एवं कानपुर में कई संस्थान होने की वजह से सरकार यह सुविधा दूसरे जिलों को देगी। हर जिले में सौ-सौ बेड का कैंसर अस्पताल बनने से बड़े संस्थानों पर भार कम होगा, वहीं मरीजों की पहली-दूसरी स्टेज में डाइग्नोसिस कर इलाज करना आसान होगा। |