नई दिल्ली। देश के सबसे प्रभावशाली अंग्रेज़ी अख़बारों में शुमार द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मालिकाना ढांचे में बड़े बदलाव की अटकलें तेज़ हो गई हैं। सोशल मीडिया के एक हिस्से में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, आने वाले दिनों में टाइम्स ग्रुप में बड़ा ओनरशिप ट्रांजिशन देखने को मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) के वाइस चेयरमैन और मीडिया कारोबारी समीर जैन समूह के प्रमुख ब्रांड्स को लेकर दीर्घकालिक रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और मीडिया इंडस्ट्री में तेज़ तकनीकी बदलावों के बीच पारंपरिक प्रिंट आधारित मॉडल की भविष्य की संभावनाओं को लेकर वे आशंकित हैं।
बताया जा रहा है कि समीर जैन इस समय अमेरिका के कैलिफोर्निया में हैं और परिवार के करीबी सदस्यों, जिनमें उनकी बेटी और दामाद भी शामिल हैं, से संभावित बिक्री या पुनर्गठन को लेकर चर्चा कर रहे हैं। परिवार का एक वर्ग इसे बदलते मीडिया परिदृश्य में एक व्यावहारिक कदम मान रहा है।
उधर, टाइम्स ग्रुप के भीतर की स्थिति को देखें तो मीडिया हाउस का प्रभावी नियंत्रण समीर जैन और उनके छोटे भाई विनीत जैन के बीच बंटा हुआ माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि विनीत जैन समूह के टेलीविज़न और फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं, जो अलग से निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है, अगर व्यापक स्तर पर कोई रीस्ट्रक्चरिंग होती है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विनीत जैन किसी संभावित बिक्री या एसेट डिवीजन को लेकर क्या रुख रखते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे फ्लैगशिप ब्रांड से जुड़ा कोई भी बड़ा सौदा दोनों भाइयों की सहमति के बिना संभव नहीं होगा, क्योंकि ग्रुप की मीडिया संपत्तियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित डील में देश के दो बड़े कॉरपोरेट दिग्गजों — मुकेश अंबानी और गौतम अडानी — की दिलचस्पी बताई जा रही है। दोनों ही उद्योगपति हाल के वर्षों में मीडिया, टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर में आक्रामक विस्तार कर चुके हैं।
हालांकि अभी तक किसी भी तरह की औपचारिक बोली या सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने में रुचि के संकेत और अनौपचारिक बातचीत शुरू होने की बात कही जा रही है।
अगर ये अटकलें सही साबित होती हैं, तो यह भारतीय मीडिया इतिहास के सबसे बड़े स्वामित्व बदलावों में से एक होगा, जिसका असर पूरे न्यूज़ इकोसिस्टम पर पड़ेगा।
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