जागरण संवाददाता, संतकबीर नगर। इस बार गत वर्ष की अपेक्षा दस प्रतिशत अधिक स्वास्थ्य विभाग के लिए बजट का प्रस्ताव किया गया है। इस बजट से अब जिले में मेडिकल कालेज, ट्रामा सेंटर, शिवबखरी गांव में अधूरे पड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,जिला अस्पताल की सी आर्म मशीन,जिरियाट्रिक वार्ड समेत अन्य कार्य के होने की आस जग गई है।जनपद वासियों में यह उम्मीद हो गई है कि अब रोगियों को जिले में ही सभी उच्च चिकित्सकीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगेगी।
यदि किसी को गंभीर रोग से परेशानी हो तो उन्हे संसाधनों के अभाव में हायर सेंटर रेफर जिला अस्पताल से कर दिया जाता है। या तो मेडिकल कालेज या फिर लखनऊ के लिए भेजा जाता है।लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा बीते बुधवार को पेश किये गए बजट में गत बर्ष की अपेक्षा दस प्रतिशत अधिक बजट का प्राविधान किया गया है।जिससे लोगो को स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं के मिलने की आस जग गई है।
जंगलकला में मेडिकल कालेज के लिए चिह्नित की गई थी भूमि
तत्कालीन उप जिला अधिकारी खलीलाबाद शैलेंश कुमार दूबे के नेतृत्व में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रामानुज कन्नौजिया व दो सदस्यीय लखनऊ की टीम ने वर्ष 2021 में जंगकला के पास मेउिकल कालेज बनाने के लिए भूमि की सर्वे की थी।
इसमें जिला अस्पताल में चिकित्सकीय कार्य करने व आवासीय कालोनी उक्त स्थान पर करने की सभी नें सहमति जताई थी। लेकिन कुछ दिन बाद यह योजना बंद बस्ते में चली गई।लेकिन अब बजट में14 नए मेडिकल कालेज का प्रस्ताव किया गया है।जिससे जनपदवासियों को यह विंग बनने की आस जग गई है।
क्रिटिकल केयर यूनिट बनने से गंभीर रूप से बीमार रोगी को मिलेगी राहत
वैसे पेास्टमार्टम हाऊस के पास क्रिटिकल केयर यूनिट बनने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।जिसे जल्द चालू होने की उम्मीद है।शहर के एडवोकेट सत्यप्रकाश टीटू ने बताया कि जनपद में गंभीर रुप में बीमार रोगियों को उपचार करने के लिए संसाधनों का अभाव है।लेकिन यदि यह यूनिट बन जाय तो घायलों व गंभीर रूप से बीमारों का उपचार के लिए काफी राहत मिलेगी।
शिव बखरी में अधूरे पडी सीएचसी के निर्माण होने की जगी आस
जिले के दक्षिणी छोर पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण वर्ष 2015 से चल रहा थ लेकिन कुछ वर्ष से यह कार्य बजट के अभाव में अधूरा पड़़ा हुआ है लेकिन सरकार ने बजट में दस प्रतिशत अधिक धनराशि का प्रस्ताव की है।प्रदीप सिंह सिसौदिया ने कहा कि यदि यह अस्पताल बन कर संचालित हो जाता है तो जनपद के दक्षिणी क्षेत्र के करीब पचास हजार आबादी को उपचार कराने में काफी राहत मिलेगी।
जिरियाट्रिक वार्ड बनने की जगी आस
बजट के अभाव में जिले के बुजुर्गों को उपचार के लिए कोई ठोस प्रवंध नही है। उन्हे भी जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती कर उपचार किया जाता है ।करीब सात वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में यह वार्ड बनाने का कार्य चालू किया गया लेकिन बजट के अभाव में कुछ ही कार्य होने के बाद बंद कर दिया गया।
दारोगा तिवारी,सुजीत श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने इस बार स्वास्थ्य विभाग को दस प्रतिशत अधिक बजट दी है ।जिससे जनपद वासियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में कई अन्य सुविधाओं के मिलने की आस जग गई है । |