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रोहतक के सुनारिया जेल रोड पर 32 कुत्तों की मौत (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, रोहतक। सुनारिया जेल रोड डंपिंग साइट पर 32 कुत्तों की मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि नगर निगम की कुत्तों की बधियाकरण व्यवस्था की गहरी खामियों का परिणाम है। एसडीएम आशीष कुमार की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक जांच कमेटी की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि कुत्तों की देखरेख से लेकर आपरेशन तक पूरी प्रक्रिया बिना नियंत्रण और निगरानी के चल रही थी।
जांच में सामने आया कि बधियाकरण का कार्य संभाल रही नैन फाउंडेशन ने जिम्मेदारी तो ली, लेकिन जवाबदेही निभाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं बनाई। आपरेशन के बाद कुत्तों की हालत क्या थी, उन्हें किस स्थान पर छोड़ा गया और क्या उनकी रिकवरी पर कोई निगरानी रखी गई, इन सभी सवालों के जवाब रिकार्ड में नदारद मिले। संवेदनशील कार्य के लिए कोई मानक आपरेशन कक्ष तक उपलब्ध नहीं था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुत्तों की मौत का कारण हाइपोथर्मिया और संक्रमण बताया गया है, जो सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि आपरेशन के बाद आवश्यक देखभाल पूरी तरह नजरअंदाज की गई। जांच के दौरान फाउंडेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का निष्क्रिय पाया जाना भी गंभीर माना जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि यह भी संदेह गहराया है कि कहीं साक्ष्यों को नजरअंदाज तो नहीं किया गया। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और सैंपल मधुबन लैब भेजे गए हैं।
बीती 13 जनवरी को हुई इस घटना ने शहर में पशु कल्याण को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। एसडीएम ने रिपोर्ट में सिफारिश की है कि भविष्य में ऐसी योजनाओं में केवल टेंडर प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि रोजाना निरीक्षण, मेडिकल आडिट और मल्टी-लेवल मानिटरिंग अनिवार्य की जाए। प्रशासन अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। |
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