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7 सालों से हत्या के आरोप में जेल में बंद है आरोपी मुकदमे में देरी पर SC ने उठाए सवाल (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि हत्या के आरोप में गिरफ्तार एक विचाराधीन कैदी सात वर्षों से जम्मू-कश्मीर की जेल में बंद है। शीर्ष अदालत ने मुकदमे में देरी पर सवाल भी उठाया।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अब तक 19 में से सिर्फ चार सरकारी गवाहों की ही गवाही हुई है। पीठ ने जम्मू-कश्मीर सरकार और संबंधित ट्रायल कोर्ट से जवाब मांगा है कि मुकदमा पिछले सात वर्षों से लंबित क्यों है।
पीठ ने राज्य सरकार के वकील से कहा, “आपको मुकदमा पूरा होने में देरी को सही ठहराने का एक संतोषजनक कारण बताना होगा।“ वकील ने अनूप सिंह नामक व्यक्ति की जमानत याचिका पर राज्य का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर रणवीर पीनल कोड (अब आइपीसी) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
याचिका हुई थी खारिज
शीर्ष अदालत ने कहा, “अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका है। हम इस बात से परेशान हैं कि याचिकाकर्ता 2018 से एक विचाराधीन कैदी के तौर पर हिरासत में है।“ पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से भी कहा कि वह संबंधित ट्रायल कोर्ट से इस बारे में जवाब मांगे कि मुकदमे की स्थिति क्या है और मुकदमा पिछले सात वर्षों से लंबित क्यों है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनूप सिंह को 18 अक्टूबर, 2018 को सांबा जिले में पंजीकृत अपराध के सिलसिले में हाई कोर्ट ने नियमित जमानत देने से मना कर दिया था। हाई कोर्ट ने 30 जून, 2025 को अनूप सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और ट्रायल कोर्ट को किसी भी पक्षकार को बिना वजह स्थगन दिए मुकदमे में तेजी लाने का निर्देश दिया था।
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