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बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक सेवन से किशोर ICU में भर्ती, बिना डॉक्टर की सलाह दवा खाने वाले हो जाएं सावधान

cy520520 2026-1-25 18:27:23 views 1102
  

एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक सेवन करने से एक मरीज एसआरएन अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया है।



अमरदीप भट्ट, प्रयागराज। साधारण बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं की बेतहाशा डोज ने 17 वर्षीय अनिकेत को आइसीयू तक पहुंचा दिया। अनिकेत को एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रजिस्टेंस) हो गया है, इसके चलते अब उस पर कोई भी एंटीबायोटिक का असर नहीं हो रहा है। यह उदाहरण केवल एक मरीज का नहीं बल्कि एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और इसके सेवन तथा मेडिकल स्टोर से बिक्री पर किसी तरह का नियंत्रण न होने के अनगिनत मामले हैं।
डाॅक्टर जानते हैं एंटीबायोटिक दवाएं किसे, कब देनी है

एंटीबायोटिक दवाएं दिए जाने की डोज है। मरीज में संक्रमण के स्तर की जानकारी पैथालॉजी परीक्षण या कल्चर टेस्ट के आधार पर होने के बाद दिए जाने का नियम है। डाॅक्टर जानते हैं कि एंटीबायोटिक दवाएं किसे और कब दी जानी चाहिए। हंडिया तहसील क्षेत्र के बरौत निवासी विनोद कुमार के बेटे अनिकेत को एंटीबायोटिक दवाओं के असुरक्षित इस्तेमाल का दंश अब भोगना पड़ रहा है।
पहले नासिक फिर बरौत में दी गई दवाएं

स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के मेडिसिन आइसीयू में भर्ती हुए अनिकेत को सितंबर में नासिक में रहते बुखार हुआ था। किसी बड़े अस्पताल में न जा कर मुहल्ले के ही झोलाछाप से इलाज कराता रहा। हालत गंभीर हुई तो घर आकर बरौत में स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने लगा। यहां उसे एंटीबायोटिक के इंजेक्शन तक दिए गए।
हालत बिगउ़ी तो एसआरएन अस्पताल ले आए

हालत और बिगड़ी तो परिवार के लोग एक जनवरी को उसे एसआनएन अस्पताल ले आए। डाॅक्टर ने दवाएं लिखने के बाद तीन दिन में फिर आने के लिए कहा लेकिन परिवार ने हालत में कोई सुधार न देख पुन: बरौत के ही निजी अस्पताल में इलाज कराया। अब उस पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं।
अब पछता रहे नाना और मां

अनिकेत के नाना गुलाब चंद्र और मां सरिता के अनुसार उन्हें यह नहीं पता था कि गांव के निजी अस्पताल या झोलाछाप से इलाज कराने का दुष्प्रभाव भुगतना पड़ सकता है। बेटे की जान किसी तरह से बच जाए, अब तो नाना ओर मां की भगवान से यही कामना है।
विपिन, लालता, और न जाने कितने...

स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में इलाज कराने के लिए आ रहे मेजा के रहने वाले विपिन और कौड़िहार निवासी श्रमिक लालता प्रसाद पर डाक्टर अब इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन मरीजों के बारे में डाक्टरों ने बताया है कि मेडिकल स्टोर से स्वयं ही एंटीबायोटिक दवाएं लेकर खाते रहे। अब इन पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं। हालांकि हालत गंभीर नहीं है।
क्या कहते हैं एसआरएन अस्पताल के फिजीशियन

एसआरएन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुजीत वर्मा का कहना है कि मरीज अनिकेत को लाए जाने से पहले दूसरे अस्पतालों में अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाएं दिए जाने की जानकारी परिवार से पता चली है। उसे अब दिमागी बुखार और सेप्टीसीमिया हो गया है। एंटीबायोटिक दवाएं पूरी क्षमता से असर नहीं कर रही हैं। निजी अस्पताल में कल्चर टेस्ट करा लेना चाहिए उसके बाद एंटीबायोटिक दिया जाना चाहिए।

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