तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अमेरिकी नागरिकों से जालसाजी कर विदेशी धन बटोरने वाले फर्जी काल सेंटर का पर्दाफाश होने के बाद अब इस प्रकरण की जांच सिर्फ स्थानीय पुलिस और साइबर सेल तक सीमित नहीं रहेगी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले में मनी लान्ड्रिंग तथा विदेशी लेनदेन के एंगल से जांच करेगी।
ईडी का फोकस इस बात पर रहेगा कि ठगी से हासिल की गई रकम किन रास्तों से भारत आई, किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई और आगे उसका इस्तेमाल कहां और किस रूप में किया गया।
सूत्रों के अनुसार, चिलुआताल क्षेत्र में किराए के मकान से चल रहे फर्जी काल सेंटर के भंडाफोड़ के बाद जब विदेशी नागरिकों से ठगी और अंतरराष्ट्रीय लिंक के तथ्य सामने आए, तो मामला ईडी के संज्ञान में आया। पुलिस की शुरुआती जांच में जिन बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और विदेशी कॉलिंग पैटर्न का पर्दाफाश हुआ है, वे सीधे मनी लान्ड्रिंग के दायरे में आते हैं।
इसी आधार पर ईडी अब औपचारिक जांच की दिशा में कदम बढ़ा रही है। पुलिस ने गुरुवार को कार्रवाई करते हुए फर्जी काल सेंटर के संचालक समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया था। आरोपित स्वास्थ्य बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का झांसा देकर खासतौर पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहे थे। मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।
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इन सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच चल रही है, जिससे ई-मेल डाटा, कॉल लाग, विदेशी आईपी एड्रेस और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। इससे पहले 17 अगस्त 2023 को बेतियाहाता इलाके में पकड़े गए फर्जी काल सेंटर के मामले में भी ईडी ने जांच की थी। उस केस में ब्रिटिश नागरिकों से ठगी, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और मनी लान्ड्रिंग के संकेत मिले थे।
उसी तर्ज पर अब चिलुआताल मामले में भी विदेशी धन के पूरे नेटवर्क को खंगालने की तैयारी है। ईडी की जांच शुरू होते ही आरोपितों के बैंक खातों, संपत्तियों और संभावित बेनामी निवेश पर भी नजर डाली जाएगी। पुलिस और साइबर सेल द्वारा जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य ईडी के लिए जांच की मजबूत बुनियाद बनेंगे। |
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