हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम को ई बसों की सप्लाई नहीं मिल पाई है। जारगण आर्काइव
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को इलेक्ट्रिक बसों के लिए अभी दो माह और इंतजार करना होगा। टेंडर में तय समय सीमा के भीतर कंपनी बसों की डिलीवरी नहीं करवा पाई है। इसको लेकर उन्होंने निगम प्रबंधन को ई-मेल के माध्यम से सूचित कर दिया है। दिसंबर में कंपनी ने कहा था कि ई-बसों की बैटरी में एक चिप लगती है, जो चीन में निर्मित होती है। जब यह चिप आएगी, तभी बसों को तैयार करके भेजा जाएगा।
कंपनी ने बसों की डिलिवरी के लिए समय मांगा था। निगम प्रबंधन ने अतिरिक्त समय देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने एक बस ट्रायल को भेजी।
अब कंपनी ने कह दिया है कि अभी बसों की डिलिवरी करने में मार्च तक का समय लगेगा। मार्च में भी 50 प्रतिशत बसें ही वह मुहैया करवा पाएंगे। कंपनी का तर्क है कि बसें अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हैं। निगम ने 297 ई-बसों का टेंडर जारी किया है, जिसके अनुसार कंपनी को नौ जनवरी तक 149 बसों की डिलीवरी करनी थी।
कंपनी के तकनीकी तर्कों को सुनने के बाद निगम प्रबंधन अब ज्यादा जल्दबाजी नहीं कर रहा है। प्रबंधन ने जल्द से जल्द बसों की डिलिवरी करने को कहा है। इस मुद्दे पर एचआरटीसी की निदेशक मंडल की बैठक में भी चर्चा हो चुकी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर की अग्रणी कंपनी ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड को ई-बसों का 424.01 करोड रुपये का टेंडर मिला है।
400 बसों को हटाने से पेश आ रही दिक्कतें
एचआरटीसी के बेड़े में करीब 400 बसें ऐसी हैं, जो अपना तय समय पूरा कर चुकी है। इनमें कई बसें तो ऐसी हैं, जिनकी माइलेज खत्म है। इन्हें चलाना घाटे का कारण बन रहा है। बीते महीने निगम ने 71 पुरानी बसों को हटा दिया है। यदि मार्च तक नई बसें नहीं आती तो दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाएगी। इसके अतिरिक्त 100 से 150 बसें ऐसी हैं, जिनकी स्थिति बेहद खराब है।
आधे घंटे में चार्ज होगी बस, 180 किमी चलेगी
निगम प्रबंधन के अनुसार ई-बस 30 सीटर है। इसे आधे घंटे में चार्ज किया जा सकेगा। एक बार चार्ज करने पर यह 180 किलोमीटर तक चलेगी। इसकी लागत 1.71 करोड़ रुपये है। कंपनी इसके रखरखाव की जिम्मेदारी 12 साल तक लेगी।
बसों की डिलिवरी में देरी के लिए कंपनी ने कुछ तकनीकी कारण बताए हैं। कंपनी प्रतिनिधियों के साथ लगातार चर्चा हो रही है। उन्हें निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द बसों को भेजें। मार्च तक ये बसें आ जाएगी।
-डा. निपुण जिंदल, प्रबंध निदेशक, एचआरटीसी।
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