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इंदौर के महू में जलजनित रोगों का तांडव: हेपेटाइटिस की चपेट में आए दर्जनों बच्चे, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

deltin33 1 hour(s) ago views 173
  

अब इंदौर के महू में जलजनित रोगों का प्रकोप, कई बच्चे हेपेटाइटिस संक्रमण से पीड़ित (फोटो- एक्स)



जेएनएन, इंदौर। मध्य प्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा के बाद अब जिले के महू नगर में दूषित पेयजल की आपूर्ति से जलजनित बीमारियों के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। यहां कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के पत्ती बाजार स्थित नीम गली और यादव मोहल्ले में शनिवार को पीलिया और टाइफाइड के दो नए मरीज सामने आए। इस तरह मरीजों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है।
बच्चों में हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई वायरस पाया गया

शुक्रवार तक अस्पताल में भर्ती 10 रोगियों में से सात को शनिवार को छुट्टी दे दी गई। दो नए मरीजों सहित पांच बच्चे अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल में लिए गए रक्त के नमूनों में बच्चों में हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई वायरस पाया गया है।

रोगियों के लिवर में संक्रमण के चलते सूजन की समस्या देखने में आ रही है। बताया गया है कि दूषित पेयजल से बच्चों में यह संक्रमण हुआ है। वहीं, महू के गायकवाड क्षेत्र में लोगों ने भी दूषित जल की शिकायत की है। यहां भी पानी के नमूले लिए गए हैं। महू के मेवाड़ा अस्पताल में भर्ती चंदर मार्ग निवासी भूमिका स्वामी (19) की जांच रिपोर्ट में हेपेटाइटिस ए वायरस पाया गया है।

स्थानीय निवासी मोहम्मद उमर शलमानी (12) की जांच रिपोर्ट में हेपेटाइटिस ए और ई दोनों वायरस पाए गए हैं। चिकित्सक डा. विमल कुमार सक्सेना ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और ई वायरस दूषित पानी में पाया जाता है। पानी में यदि मल-मूत्र मिलता है तो संक्रमण और बढ़ जाता है। यदि सही समय पर उपचार न मिले तो स्थिति बिगड़ सकती है।
लेकिन पीएचई की जांच में पानी दूषित नहीं

महू में जलजनित बीमारियों के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच शनिवार को आई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की जांच रिपोर्ट में पानी को दूषित नहीं माना गया है।

महू के एसडीएम राकेश परमार ने बताया कि शुक्रवार को पीएचई ने पत्ती बाजार के चंदर मार्ग और सुर्की गली से नर्मदा जल के सात और निजी व शासकीय बोरवेल के नौ सैंपल लेकर जांच की गई थी। सवाल उठ रहा है कि अगर पानी साफ है तो फिर जल जनित बीमारियों से बड़ी संख्या में लोग बीमार क्यों हो रहे हैं?

हालांकि, एसडीएम का कहना है कि अभी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों के घर से लिए गए पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट पुणे से आनी बाकी है। इसमें माइक्रोआर्गेनिज्म और वायरोलाजी की जांच की जाएगी।
घरों के नीचे दबी है ड्रेनेज लाइन

महू कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में अंग्रेजों के समय का ड्रेनेज सिस्टम है। 70 साल पुरानी पाइप लाइन है, जिससे पूरे क्षेत्र में नर्मदा का जल सप्लाई किया जाता है। जिस क्षेत्र में नर्मदा लाइन नहीं है, वहां शासकीय बोरवेल से पानी पहुंचाया जाता है। सालों पुरानी जलापूर्ति प्रणाली के चलते पेयजल पाइप लाइन कई क्षेत्रों में नालियों से गुजर रही हैं।

पत्ती बाजार के चंदर मार्ग, सुरकी गली व अन्य क्षेत्र में लोगों ने जल निकासी के लिए बनाई नालियों पर कब्जा करके घर बना लिए हैं। करीब 10 साल से यह नालियां घरों के नीचे दबी हुई हैं।
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