राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) के तहत अस्पतालों की फुटेज की मांग किए जाने पर एक अहम व्यवस्था दी है।
आदेश में लिखा है कि अस्पताल परिसर की सीसीटीवी फुटेज सिर्फ पुलिस जांच और न्यायालय के आदेश का हिस्सा होने पर ही दिया जा सकता है।
किसी अन्य व्यक्ति की मांग पर फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है। उन्होंने लिखा है कि अस्पताल सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज, उनके स्वजन, चिकित्सक और स्टाफ का आवागमन रहता है। फुटेज में सिर्फ अपीलकर्ता ही नहीं, बल्कि अनेक मरीजों और अन्य व्यक्तियों की गतिविधियां भी रिकार्ड होती हैं। यह सबकी निजता से जुड़ा हुआ है।
जब तक कोई वाजिब वजह न हो आरटीआइ कानून किसी की निजता के उल्लंघन की इजाजत नहीं देता है। किसी व्यक्ति को उसकी शिकायत को पुख्ता करने के लिए सैकड़ों दूसरे लोगों को निजता में दखलअंदाजी करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है।
सूचना आयुक्त ने लिखा है कि पुलिस जांच का हिस्सा होने और न्यायालय के आदेश के अतिरिक्त किसी तीसरी स्थिति में फुटेज देने का आदेश देने के बारे में तभी सोचा जा सकता है जब किसी अन्य की निजता प्रभावित नहीं हो रही हो।
रोजमर्रा की किसी शिकायत को पुख्ता करने के लिए किसी व्यक्ति को फुटेज उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
सूचना आयुक्त ने यह आदेश बिजनौर जिले के एक अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज के लिए कुलवंत सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए दी। लिखा है कि यदि किसी प्रकार के फर्जी मेडिकल से संबंधित आरोप सत्य भी हैं, तो उनके परीक्षण के लिए पुलिस जांच या सक्षम न्यायालय का आदेश होना चाहिए। आरटीआइ अधिनियम को जांच अथवा ट्रायल का विकल्प नहीं बनाया जा सकता है। |
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