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माआवोदी हिंसा और बंदूक के साए से बाहर निकला छत्तीसगढ़ का पोटाली, आरोग्य मंदिर बना उम्मीद की मिसाल

deltin33 1 hour(s) ago views 536
  

माआवोदी हिंसा और बंदूक के साए से बाहर निकला छत्तीसगढ़ का पोटाली (सांकेतिक तस्वीर)



जेएनएन, रायपुर। कभी माआवोदी हिंसा और भय की पहचान रहा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का पोटाली आज विकास, भरोसे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल बन चुका है। यहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, लेकिन अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की गारंटी बनकर खड़ा है।

पोटाली का यह परिवर्तन माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में विकास की जीत की कहानी है। करीब डेढ़ दशक तक माओवादी हिंसा और असुरक्षा के कारण बंद पड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र (एसएचसी) स्थानीय लोगों के लिए एक अधूरा सपना था। साधारण दवा के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा जाना मजबूरी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।

एसएचसी पोटाली के भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। माओवादियों के तीव्र विरोध और भय के कारण निर्माण पूरा नहीं हो पाया। ग्रामीणों के अनुरोध पर 2022 में काम दोबारा शुरू हुआ। 26 अप्रैल 2023 को अरनपुर क्षेत्र के पास माओवादी घटना के बाद निर्माण कार्य फिर ठप हो गया।

इस घटना में वाहन चालक समेत 10 डीआरजी जवान बलिदान हुए थे। ग्रामीणों से संवाद और जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद नवंबर 2023 में कार्य फिर शुरू हुआ। निर्माण कार्य में सक्रिय तत्कालीन जनपद सदस्य की माओवादियों ने 26 अप्रैल 2024 को हत्या कर दी, जिससे तीन महीने काम रुका रहा।

एसएचसी को मिला एनक्यूएएस का प्रमाण पत्र एक जनवरी 2025 को आयुष्मान आरोग्य मंदिर का उद्घाटन हुआ और साल भर बाद ही नौ जनवरी को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अब दूरस्थ और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।

माओवादी घटनाएं, सुरक्षा संकट, दीर्घकालिक अवरोध और जनप्रतिनिधि की हत्या के बावजूद जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तकनीकी सहयोग और स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भय से बड़ा संकल्प होता है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर से 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। यहां चार कर्मचारी पदस्थ हैं, जिनमें एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, दो महिला ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और एक पुरुष ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक शामिल हैं।

पोटाली की सफलता राज्य सरकार की स्पष्ट सोच और सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में विकास की धारा वहां तक पहुंचेगी, जहां अब तक केवल उपेक्षा पहुंची थी। पोटाली ने बता दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सबसे कठिन रास्ते भी मंजिल तक पहुंचते हैं।- श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
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