सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला। (जागरण)
जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के ब्लॉक ग्रांट शिक्षकों और शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए न्याय की बड़ी जीत हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य के हजारों शिक्षकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उन्हें 1994 के अनुदान सहायता (जीआईए) आदेश के अनुसार वेतन भुगतान करने के निर्देश को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है।
सरकार की याचिका खारिज
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। अदालत ने ओडिशा उच्च न्यायालय के उस पिछले आदेश की पुष्टि की, जिसमें शिक्षकों को 1994 के मानदंडों के आधार पर वित्तीय लाभ देने की बात कही गई थी।
क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि ओडिशा उच्च न्यायालय ने बीते वर्ष 5 मई को न्यायमूर्ति बिराजा प्रसन्ना सतपथी के 19 मार्च के फैसले को बरकरार रखा था।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार द्वारा 1994 के अनुदान सहायता आदेश को बाद में निरस्त किए जाने से शिक्षकों के पहले से अर्जित अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता। इससे पहले राज्य शिक्षा न्यायाधिकरण (स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल) ने भी शिक्षकों के पक्ष में ही फैसला सुनाया था।
लंबी कानूनी लड़ाई का अंत
राज्य सरकार ने ट्रिब्यूनल के फैसले को पहले उच्च न्यायालय में चुनौती दी और वहां से विफलता मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इस लंबी कानूनी लड़ाई पर विराम लग गया है।
इस फैसले से अब राज्य के ब्लॉक ग्रांट शिक्षकों को 1994 के जीआईए ढांचे के तहत वेतन और अन्य लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे शिक्षक समुदाय में हर्ष की लहर है। |
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