जागरण संवाददाता, आगरा। रंगबाज राज चौहान के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, मारपीट सहित अन्य धाराओं में तीन मुकदमे दर्ज थे। दो दिसंबर को जेल से छूटने के बाद शक्ति प्रदर्शन के लिए जुलूस निकालने पर उसके खिलाफ न्यू आगरा थाने में भी मुकदमा दर्ज हुआ था।
अपराधिक वारदातों में बढ़ती उसकी संलिप्तता से मां को एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसी कारण गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज न होने के बाद भी मां ने शुक्रवार को ही राज की जमानत कराई थी। जमानत वाले दिन ही वर्चस्व की लड़ाई में उसकी हत्या कर दी गई।
दो दिसंबर 2025 को जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद राज चौहान का नाम यमुना पार इलाके में होने वाली अपराधिक वारदातों में कई बार सामने आया था। इसके बाद से मां नीरज देवी को एनकाउंटर का डर सताने लगा था।
उसके खिलाफ न्यू आगरा थाने में मुकदमा सार्वजनिक तौर पर उपद्रव करना व लापरवाही वाहन चलाने जैसी सामान्य धाराओं में दर्ज था। मुकदमे में कोई भी धारा ऐसी नहीं था, जिसमें सात वर्ष से अधिक की सजा हो। बावजूद इसके मां लगातार राज से जमानत कराने के लिए कह रही थीं।
राज के जमानत के लिए नहीं आने पर मां शुक्रवार को खुद ही उसे लेकर दीवानी आई थीं। यहां उनके अधिवक्ता ने राज को न्यायालय में हाजिर किया और उसी दिन उसे जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद राज अपने अधिवक्ता से बिना मिले ही दीवानी से साथ आए अपने साथियों के साथ चला गया था।
साथ रहती थी साथियों की फौज, पोस्टमार्टम पर थे सिर्फ चार लोग
राज का गैंग दिनोंदिन बड़ा हो रहा था। हर समय उसके साथ साथियों की फौज साथ रहती थी। जेल से निकाले गए जुलूस में भी एक दर्जन कारों व 40 बाइकों के साथ दो सौ युवक जुलूस में शामिल हुए थे। हत्या के बाद उसके साथी नजर नहीं आए। पोस्टमार्टम हाउस पर शनिवार को सिर्फ चार लोग ही मौजूद थे। ये लोग भी राज की गैंग के नहीं, बल्कि उसके रिश्तेदार थे। |
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