वसंत पंचमी पर सूरजकुुंड स्थित प्राचीन श्री सरस्वती मंदिर से मां शारदे की शोभायात्रा---जागरण
जागरण संवाददाता, मेरठ। सूरजकुंड स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री सरस्वती मंदिर से शनिवार को मां सरस्वती की 56वीं शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर के पुजारी पंडित हरिहर नाथ झा ने पूजन कराया। मुख्य तिलककर्ता प्रदीप कुमार, राधेलाल गुप्ता व उमेश अग्रवाल रहे। आयोजक मां सरस्वती उत्सव मित्र मंडल के अध्यक्ष नरेंद्र प्रताप गौड़ ने बताया कि यह वार्षिक शोभायात्रा हर वर्ष वसंत पंचमी पर्व पर निकाली जाती है।
यह मंदिर 187 वर्ष पुराना है। शोभायात्रा में मिलन, चमन व आशा बैंड ने धुनों पर भजन गायन करते हुए विद्यादायिनी का गुणगान किया। गणेश, राधा-कृष्ण, शंकर पार्वती, मां दुर्गा, मां काली की झांकी के अलावा फूलों से सुसज्जित मुख्य रथ पर मां सरस्वती की मनमोहक प्रतिमा विराजमान रही।
भंडारे में प्रसाद वितरण किया गया। मां सरस्वती मंदिर से शुरू होकर शोभायात्रा सूरजकुंड रोड से हापुड अड्डा, गांधीनगर, कैलाशपुरी, जयदेवीनगर, वैशाली, फूलबाग कालोनी, हंस चौपला, मोहनपुरी, सुभाषनगर होते हुए मां सरस्वती मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। अनुराग वर्मा, संजीव गर्ग, महेंद्र शर्मा, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, संजय शर्मा, विनीत गर्ग व अन्य का सहयोग रहा।
मां सरस्वती के साथ विराजित हैं माता महालक्ष्मी व महाकाली
मंदिर समिति के अध्यक्ष विनीत गर्ग कहते हैं कि सूरजकुंड स्थित मां सरस्वती का मंदिर लगभग 187 वर्ष पुराना है। पूर्वज बताते थे कि स्वतंत्रता से पूर्व एक अंग्रेज महिला को देवी ने दर्शन दिए थे, जिसके बाद मंदिर वाले स्थान की खोदाई की गई। उसमें देवी सरस्वती की मूर्ति निकली।
इस घटना से जोड़ते हुए पूर्वजों का दावा था कि यह प्रमाण है कि मुगल काल में मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। 1839 में मंदिर का शुरूआती निर्माण हुआ। यह शहर का एकमात्र मंदिर है, जो मां सरस्वती को समर्पित व प्राचीनता दर्शाता है। वसंत पंचमी पर शिक्षा, साहित्य, कला व गायन से जुड़े लोग व विद्यार्थी दूर-दूर से आकर यहां दर्शन करते हैं। |