जागरण संवाददाता, कानपुर। यूपीआई की तरह ही देश का यूएचआई माडल भी बनकर तैयार है जिसे जल्द ही लांच किया जाएगा। इससे देश की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डा. सुनील कुमार बरनवाल ने शनिवार को यहां आइआइटी कानपुर में आयोजित डिजिटल हेल्थ स्टैक कार्यशाला में शिरकत करने के बाद मीडिया से यह बात कही।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस माडल और उपकरणों के प्रयोग को विश्वसनीय आधार देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए आईआईटी कानपुर के नेतृत्व में इको सिस्टम विकसित किया जा रहा है जो माडल की सटीक प्रणाली और वैधता को प्रमाणित कर सकेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं में एआई का प्रयोग बढ़ने से गंभीर रोगों के उपचार में आसानी होगी। साथ ही समूह स्तर पर तेजी से फैलने वाली बीमारियों की पहचान भी शुरुआती स्तर पर हो सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में बिहार पहला राज्य हो गया है जहां विकास खंड स्तर से लेकर जिला स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में रोगियों का पंजीकरण, परामर्श व जांच रिपोर्ट सब कुछ डिजिटल माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है। इस तरह के डिजिटल डेटा की मदद से एआई माडल विकसित किए जाएंगे जो भारत के लोगों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा में प्रभावी साबित होंगे।
वैश्विक स्तर पर उपलब्ध एआई माडल की कमी है कि उनमें विदेशों के लोगों के स्वास्थ्य डेटा का प्रयोग किया गया है। इस कमी को भारतीय एआई माडल में दूर किया जाएगा। यह काम भी आईआईटी कानपुर के इको सिस्टम में किया जाएगा। आईआईटी एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करेगा जहां से नए एआई माडल का डेटा प्राप्त करना और समस्या का समाधान उपलब्ध करना आसान हो जाएगा। इससे डेटा और एआई माडल दोनों को प्रमाणित भी किया जा सकेगा। एनएचए के पास आज भी 11 करोड़ भारतीय रोगियों का डेटा है जिसकी मदद से बेहतर एआई माडल तैयार किए जा सकेंगे।
देश का यूएचआई तैयार जल्द होगा लांच
उन्होंने बताया कि जिस तरह से देश में आज पैसों का डिजिटल लेन - देन हो रहा है उसी तरह से देश का यूएचआई माडल भी तैयार किया गया है। इस देश के नागरिकों को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुरूप समाधान चुनने का अवसर मिलेगा। इससे सभी तरह की जांच, दवा, एंबुलेंस और अस्पताल सुविधाओं की उपलब्धता व मूल्य की तुलना की जा सकेगी और उचित चयन आसान हो जाएगा। सेवा देने वालों को भी गुणवत्ता के आधार पर विकास का मौका मिलेगा।
एआई माडल तैयार करना चुनौती
आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए उपयोगी एआई माडल तैयार करने की चुनौती है। जिसे पूरा करने के लिए विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है। हमारी कोशिश देश के लिए ऐसा प्लेटफार्म तैयार करने की है जहां से नए एआई माडल विकसित किए जा सकें और उनको प्रमाणित भी किया जा सके कि वह भारतीय लोगों से प्राप्त स्वास्थ्य डेटा पर आधारित हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्रदेश सरकार 2000 करोड़ का राज्य एआई मिशन शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत पहले से ही प्रदेश के 1200 अस्पतालों में डिजिटल पर्चा बनाने, परामर्श लिखने और दवाओं के वितरण जैसे काम शुरू कराए गए हैं। इनमें से 50 अस्पताल तो आनलाइन पर्चा बनाने भी लगे हैं। मोतियाबिंद की जांच आशा कार्यकर्ताओं से कराई जा रही है जबकि लखनऊ के सरोजनीनगर में कैंसर स्क्रीनिंग की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों तक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है जिससे एआई मिशन को पूरी तरह से लागू किया जा सके।
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