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बिहार में जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था बदली, अब जीआईएस तकनीक से होगा जमीन का सत्यापन

deltin33 2 hour(s) ago views 90
  

land registration Bihar: GIS आधारित स्थल निरीक्षण को किया गया अनिवार्य। फोटो सौ. यह तस्वीरआई की मदद से तैयार की गई है।  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar land registry: बिहार में जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब जमीन के निबंधन (रजिस्ट्रेशन) से पहले उसका भौतिक सत्यापन भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य राजस्व क्षति को रोकना और भूमि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।

राज्य में न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (MVR) यानी सरकारी दरों में संभावित वृद्धि के बीच मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने राजस्व वसूली को लेकर सख्ती दिखाई है। विभाग के सचिव अजय यादव ने इस संबंध में सभी जिलों के अवर निबंधक और जिला अवर निबंधकों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसका स्थल निरीक्षण GIS तकनीक से अनिवार्य रूप से कराया जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 9130 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 5662.51 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। विभाग का मानना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति, क्षेत्रफल और उस पर बनी संरचना की सही जानकारी न देने के कारण सरकार को भारी राजस्व क्षति हो रही है।
GIS तकनीक से होगा जमीन का सत्यापन

सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि अक्सर रजिस्ट्री के दौरान पक्षकार जमीन की वास्तविक स्थिति और संरचना की सही जानकारी नहीं देते, जिससे राजस्व नुकसान होता है। इसे रोकने के लिए अब निबंधन पूर्व दस्तावेजों का गुणवत्तापूर्ण स्थल निरीक्षण और GIS तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
नगर निकाय क्षेत्र में निबंधन पदाधिकारी स्वयं करेंगे निरीक्षण

नगर निकाय क्षेत्र में स्थित जमीन और उस पर बनी संरचना का स्थल निरीक्षण अब निबंधन पदाधिकारी स्वयं करेंगे। अन्य क्षेत्रों में कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक, उच्च वर्गीय लिपिक एवं निम्न वर्गीय लिपिक को भी निरीक्षण के लिए अधिकृत किया जा सकता है।

कर्मचारियों द्वारा किए गए कुल निरीक्षणों में से 10 प्रतिशत का क्रॉस वेरिफिकेशन निबंधन पदाधिकारी स्वयं करेंगे। प्रत्येक स्थल निरीक्षण की प्रविष्टि कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में समय-सीमा तय

  • निबंधन के लिए आवेदन की तिथि से तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण अनिवार्य
  • GIS सत्यापन के बाद ही निबंधन की प्रक्रिया पूरी होगी
  • फ्लैट रजिस्ट्री के लिए बिल्डर्स एसोसिएशन और रेरा से समन्वय
  • चलंत निबंधन इकाई बनाकर कैंप के माध्यम से जागरूकता अभियान

लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के निर्देश

सचिव ने खनन लीज नवीकरण, नई लीज और नीलामवाद के लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के निर्देश दिए हैं।

  • नीलामवाद के 3213 मामले लंबित (69.43 करोड़ रुपये)
  • 47-ए के 838 मामले लंबित (31 करोड़ रुपये की वसूली प्रस्तावित)

नॉन-इनकंबरेंस सर्टिफिकेट (NEC) होंगे ऑनलाइन

अब सभी निबंधन कार्यालयों से नॉन-इनकंबरेंस सर्टिफिकेट (NEC) और सच्ची प्रतिलिपि ऑनलाइन जारी की जाएगी। डिजिटाइज न हो पाए पुराने दस्तावेजों की प्रतिलिपि ऑफलाइन दी जाएगी, लेकिन ऑनलाइन आवेदन का संदर्भ अंकित होगा।
नियमित निरीक्षण करेंगे AIG

सभी सहायक निबंधन महानिरीक्षक (AIG) सप्ताह में कम से कम तीन दिन अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण करेंगे। हर रविवार को भी न्यूनतम एक कार्यालय का निरीक्षण अनिवार्य होगा और उसकी रिपोर्ट मंगलवार तक विभाग को सौंपी जाएगी।


सचिव के निर्देश के अनुसार अब GIS तकनीक से निबंधित की जाने वाली जमीन का सत्यापन कराया जाएगा। सभी निबंधन कार्यालयों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
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राकेश कुमार, एआईजी, तिरहुत
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