सरकारी अस्पतालों को अगले माह मिलेंगे 600 नए डॉक्टर। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों को अगले महीने 600 नए युवा डॉक्टर मिलने जा रहे हैं। साल 2020-21 बैच के एमबीबीएस छात्रों का पहला दस्ता अपनी अनिवार्य बांड सेवा शुरू करने के लिए तैयार है। स्वास्थ्य विभाग ने इनकी तैनाती के लिए कवायद शुरू कर दी है।
इन एमबीबीएस छात्रों को जूनियर रेजिडेंट, ट्यूटर या डेमोंस्ट्रेटर के पदों पर लगाया जा सकता है। छात्रों से विकल्प मांगा गया है कि क्या वह सरकारी सेवाओं को चुनेंगे या सेवा प्रोत्साहन बांड राशि एकमुश्त या मासिक किस्तों में जमा करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान करने का कार्य सौंपा गया है, जहां इन डॉक्टरों को तैनात किया जा सकता है। हरियाणा सरकार की नीति के अनुसार मेडिकल छात्रों पर 30 लाख रुपये की बांड पालिसी लागू है।
अगर छात्र सरकारी अस्पतालों में सेवा देते हैं तो बांड की राशि ब्याज सहित सरकार स्वयं वहन करेगी। यदि छात्र सरकारी सेवा नहीं करना चाहते तो उन्हें 25-26 लाख रुपये एकमुश्त या किस्तों में जमा करने होंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों और करनाल स्थित चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति से जानकारी मांगी है कि बांड अवधि पूरी करने के लिए मेडिकल कालेजों में कितने छात्रों को समायोजित किया जा सकता है।
क्या इन एमबीबीएस स्नातकों को जूनियर रेजिडेंट, ट्यूटर या डेमोंस्ट्रेटर के पदों पर लगाया जा सकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को भी इन एमबीबीएस स्नातकों के लिए तैनाती स्थानों की पहचान करने को कहा गया है। इन डॉक्टरों को करीब 75 हजार रुपये वेतन दिया जाएगा। |