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भ्रष्ट अफसरों-कर्मचारियों की साल में दो बार सूची जारी करेगी सरकार। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, पटना। सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकंजा कसते हुए अब सरकारी अफसरों-कर्मचारियों प्रोन्नति (प्रमोशन) पर कड़ी निगरानी तय कर दी गई है।
निगरानी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है या आरोप पत्र समर्पित हो चुका है, उन्हें प्रमोशन देने से पहले निगरानी स्वच्छता का निर्धारण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
इसके लिए साल में दो बार जनवरी और जुलाई में निगरानी विभाग प्रशासी विभागों को ऐसे अफसर-कर्मियों की सूची उपलब्ध कराएगा जिन पर भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई-न-कोई मामला जरूर दर्ज है।
दिसंबर 2025 तक का विवरण भेजा
निगरानी विभाग की ओर से इस संबंध में सभी प्रमुख विभागों और जिला कार्यालयों को एक पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि दिसंबर 2025 तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई ने जो भी केस, कांड दर्ज किए हैं या फिर आरोप पत्र समर्पित किया है उनके नाम, समेत अन्य विवरण एक सीडी में संबंधित विभागों, प्रमंडलों और जिलों को भेजी जा रही है।
निगरानी ने अपने पत्र में कहा है कि आरोप से जुड़ी सीडी के आधार पर विभाग, प्रमंडलीय व जिला कार्यालय प्रोन्नति पंजी अपडेट कर लें। उसी के अनुरूप निगरानी स्वच्छता का निर्धारण किया जाए।
- प्रोन्नति के पहले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र जरूरी
- अब फाइलों के सहारे नहीं, पारदर्शी सूची के आधार पर होगा तय कौन अधिकारी स्वच्छ
भ्रष्ट अफसर-कर्मी का रिकार्ड जिला स्तर पर भी सुरक्षित होगा
निगरानी के आदेश के अनुसार 30 जून 2026 तक जिस अफसर-कर्मी का प्रमोशन होना है उनके लिए अलग से स्वच्छता प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि जांच के दायरे में आए कर्मियों को राहत मिल जाएगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रमंडल या जिला प्रशासन को उनके विरुद्ध यथोचित कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा।
निगरानी विभाग ने यह भी साफ किया है कि किसी भी पदाधिकारी या कर्मी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने पर उसकी छायाप्रति सहित सूचना संबंधित प्रमंडल और जिले को दी जाती है।
इसी आधार पर भ्रष्ट अफसर-कर्मी का रिकार्ड जिला स्तर पर भी सुरक्षित किया जाए ताकि प्रोन्नति देने के पहले वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी सूची
निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि संदिग्ध और आरोपित अफसर-कर्मियों की सूची निगरानी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।
विभागों को निर्देश दिया गया है कि सूची का अवलोकन किए बिना किसी भी कर्मचारी या पदाधिकारी को प्रोन्नति न दी जाए। प्रोन्नति के अतिरिक्त अन्य मामलों में यदि निगरानी स्वच्छता की आवश्यकता पड़ती है, तो नियमानुसार निगरानी विभाग से अनुरोध किया जा सकता है।
इस सख्त व्यवस्था के जरिए सरकार का स्पष्ट संदेश है भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस। अब फाइलों के सहारे नहीं, बल्कि पारदर्शी सूची और निगरानी के आधार पर ही तय होगा कि कौन अधिकारी स्वच्छ है और कौन प्रोन्नति योग्य। |
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