बीएचयू के 111वें स्थापना दिवस पर भव्य झांकियां, महामना की बगिया में उत्साह का संचार।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। वसंत पंचमी के अवसर पर महामना ने अपनी बगिया बीएचयू की स्थापना की थी, उस दिन से आज तक वसंत पंचमी पर बीएचयू में विविध आयोजनों के माध्यम से स्थापना दिवस मनाया जाता है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के 111वें स्थापना दिवस के अवसर पर, कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने ट्रॉमा सेंटर परिसर में स्थित विश्वविद्यालय के आधारशिला स्थल पर पूजा-अर्चना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं भी दीं।
आधारशिला स्थल के पूजन के बाद बीएचयू में परंपरागत रूप से विभिन्न विभागों की ओर से झांकियों का प्रदर्शन किया गया। महामना की कामना और सदभावना के भावों से ओतप्रोत और देशभक्ति के रंग में रंगे भावों ने कदमताल किया तो बीएचयू का प्रांगण सर्वविद्या की राजधानी काशी हिन्दू विवि भी गमक उठा।
काशी की वैदिक और पौराणिक परंपराएं भी नजर आईं तो आधुनिक काशी के प्रतीक के तौर पर नमो घाट की झलक भी झांकियों में उकेरी गई। गीत संगीत और शास्त्रीय परंपराएं पथ पर जीवंत हुईं तो आस्था के पथ पर परंपराओं से बीएचयू की शैक्षिक गतिविधि भी परिलक्षित हुई।
सबसे अधिक चिकित्सा विज्ञान संकाय की झांकी ने लोगों को आकर्षित किया। जिसमें आयुर्वेद और चिकित्सा के साथ ही आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ ही योग से निरोग रहने का संदेश भी दिया गया। झांकियों के माध्यम से वैदिक परंपराएं भी झलकीं तो दूसरी ओर आध्यात्म और संस्कृति का मूल भी पथ पर प्रदर्शित किया गया।
सुबह 11 बजे से झांकियों के गुजरने का क्रम शुरू हुआ तो परिसर उल्लास से ओत प्रोत नजर आने लगा। उपलब्धियों की झांकियों ने मन मोह लिया तो परिसर भी एक बारगी लगा की गणतंत्र दिवस की झांकियों की भांति हो चला है। मौसम का रुख बेहतर रहने की वजह से आयोजन को वासंतिक अहसास मिला तो परिसर पूरी तरह महामना की बगिया की भांति आयोजन से आलोकित नजर आया।
वासंतिक उल्लास झांकियों से निखरा तो विविध विभागों के ओर से उनकी उपलब्धियों ने भी पथ संचलन कर बीएचयू के सर्वविद्या की राजधानी होने के गौरव का अहसास कराया। बीएचयू के आयोजनों में शामिल होने के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे और महामना को नमन कर आयोजन का हिस्सा बने। महामना के प्रयासों और उनकी उपलब्धियों से भरे इस आयोजन के साथ ही मां सरस्वती को भी विवि परिवार ने नमन कर उनका आशीष प्राप्त किया। |