जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। देखने से कहीं नहीं लगता कि यह कार्यालय सरकारी नहीं है। सरकारी कार्यालय की तरह ही कर्मचारी। ऑनलाइन आवेदन जमा करने से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस समेत परिवहन के अन्य कार्य कराने की गारंटी। जगह भी डीटीओ कार्यालय के सामने, सरकार की जमीन पर। ऐसे में परिवहन से जुड़े काम के लिए आने वाले लोगों को यह पता करना कठिन हो सकता है कि यह डीटीओ कार्यालय है या नहीं।
सच यह है कि डीटीओ कार्यालय के सामने सरकारी जमीन पर यह कार्यालय अवैध रूप से चल रहा है। जिले में जहां सरकारी जमीन से अतिक्रमण युद्धस्तर पर हटाए गए, वहीं प्रशासन की नाक के नीचे इस अवैध कार्यालय पर किसी की नजर नहीं जाने पर सवाल जरूर उठ रहे हैं।
कार्यालय के बाहर बिचौलियों का जमावड़ा
अवैध रूप से चल रहे इस कार्यालय के बाहर बिचौलियों का जमावड़ा रहता है। वे बाहर से ग्राहक लाने का काम करते हैं। गुमटी में चल रहे इस कार्यालय के बाहर ही सौदेबाजी कर ली जाती है। इसके बाद यहां काम का ठेका ले लिया जाता है। परिवहन विभाग का अधिकतर काम आनलाइन होने से इन गुमटियों तक वाहन मालिक खुद पहुंच जाते हैं। बिचौलिये इन्हें भी झांसे में लेते हैं। हर काम की कीमत यहीं से तय होती है।
ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी काम हो या वाहन संबंधी अन्य कोई काम, बिचौलियों द्वारा इसकी कीमत तय होती है। यहां जल्दी काम कराने का झांसा देकर मनमानी उगाही करते हैं। वाहन मालिकों को बिचौलिये यह बताते हैं कि सीधे जाइएगा तो काम के लिए दौड़ते रह जाइएगा। बिना पैसा दिए कोई काम नहीं होगा। वाहन मालिकों को हर काउंटर पर पैसा देने की बात कहकर रुपये की उगाही करते हैं।
यहां काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि वे नियम से कार्यालय चला रहे हैं। इसकी जानकारी परिवहन विभाग के पदाधिकारियों व कर्मचारियों को भी है। दूसरी ओर सरकारी महकमे से इसके लिए किसी कार्यालय की स्वीकृति नहीं है और न ही अधिकृत पत्र। |
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