सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, भागलपुर। गोराडीह में मेगा औद्योगिक पार्क बनेगा। इसके लिए अतिरिक्त 13.45 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण होगा। इसे लेकर आर्थिक व सामाजिक अध्ययन (एसआइए) कराया जा रहा है। 24 रैयतों से जमीन का अधिग्रहण होगा। एलएन मिश्रा आर्थिक अध्ययन व सामाजिक परिवर्तन संस्थान के विशेषज्ञ रणधीर प्रसाद सिंह ने ग्रामीणों से फीडबैक लिया है।
लोगों का कहना है कि जमीन के बदले जमीन, जमीन के बदले नौकरी या जमीन के बदले अधिकतम मुआवजा मिले। कहा कि वे जिस दर पर जमीन की रजिस्ट्री करते या कराते हैं, उस दर से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा।
गोराडीह अंचल के मोहनपुर मौजा संख्या 476 के संबंध में 20 जनवरी को 11 बजे से उत्क्रमित उच्च विद्यालय मोहनपुर के समीप खाली पड़ी जमीन पर होगी। ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान पटना के निदेशक ने परियोजना का सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन से संबंधित प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंप दिया है।
औद्योगिक पार्क के लिए जमीन उद्योग विभाग को ट्रांसफर
गोराडीह के मोहनपुर में बनने वाले औद्योगिक कारिडोर के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 97 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को ट्रांसफर कर दिया है। पांच अगस्त को मंत्रीपरिषद की बैठक दी गई स्वीकृति के आलोक में गोराडीह अंचल के मेहनपुर मौजा के थाना संख्या 64, खेसरा संख्या 58 में 50.23 एकड़ व 62 में 46.66 एकड़ अर्जित बिहार सरकार की जमीन पर औद्योगिक कारीडोर के निर्माण के लिए उद्योग विभाग को निशुल्क अंतर्विभागीय स्थायी हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई है।
स्वीकृति इस शर्त के साथ दी गई है कि औद्योगिक कारीडोर का निर्माण नहीं होने की स्थिति में जमीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को वापस हो जाएगा। प्रमंडलीय अयुक्त के माध्यम से जून में 97 एकड़ का प्रस्ताव औद्योगिक कारीडोर के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा गया था। इसके पूर्व 117 एकड़ 18 डिसमिल का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन 155 लोगों के नाम से जमाबंदी का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन के द्वारा प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था। इसके बाद जमीन की जांच के लिए जिलाधिकारी के द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद 96.89 एकड़ का प्रस्ताव भेजा गया है।
सीएम ने की थी औद्योगिक कारिडोर बनाने की घोषणा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक फरवरी को प्रगति यात्रा भागलपुर आए थे। इस दौरान उन्होंने औद्योगिक कारिडोर बनाने की घोषणा की थी। इसके आलोक में प्रमंडलीय आयुक्त को गोराडीह अंचल के मोहनपुर मौजा के थाना संख्या 476, खाता संख्या 64, खेरारा संख्या 58 एवं 62 रकचा 70 एकड़ 52 डिसमल एवं 46 एकड़ 66 डिसमल भूमि का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया था, जिसे आयुक्त के सचिव ने 18 फरवरी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को उपलब्ध कराया गया था।
इस क्रम में अंचल अधिकारी, गोराडीह ने 21 फरवरी को उक्त भूमि पर कई रैयतों का अवैध जमाबंदी होने की सूचना देते हुए प्रश्नगत प्रस्ताव पर अग्रेतर कार्रवाई पर रोक के प्रार्थना के आलोक में 22 फरवरी को प्रश्नगत्त प्रस्ताव पर अग्रेत्तर कार्रवाई के रोक का अनुरोध विभाग से किया गया, जिसके आलोक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 28 मार्च को त्रुटि निराकरण के लिए अभिलेख वापस कर दी गई।
जिलाधिकारी द्वारा 26 मई को अंचल अधिकारी गोराडीह को औद्योगिक कारिडोर के निर्माण के लिए संशोधित भू-हस्तांतरण प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इसके आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर, 30 मई को औद्योगिक कारिडोर के निर्माण के लिए भूमि पर संशोधित निःशुल्क अन्तर्विभागीय भू-हस्तान्तरण बाद संख्या 04/2025-26 अंचल अधिकारी, गोराडीह, भूमि सुधार उप समाहर्ता, सदर एवं स्व अनुशंसा सहित उपलब्ध कराया।
96.89 एकड़ जमीन गोशाला के नाम है दर्ज
गोराडीह अंचल के मोहनपुर मौजा में 96.89 एकड़ जमीन हाल सर्वे खतियान में ट्रस्टियन गोशाला के नाम से दर्ज है या अंकित है। जिस क्रम में समाहर्ता के द्वारा प्रश्नगत भूमि से संबंधित अवैध जमाबंदी की जांच के लिए गठित संयुक्त जांच दल के द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि जिला गजट, भागलपुर असाधारण अंक 13 दिनांक 05.07.1976 को भूधारक श्री गोशाला की भूमि संबंधी बिहार भूमि सुधार (अधिकतम सीमा निर्धारण तथा अधिशेष भूमि अर्जन) अधिनियम 1961 की धारा 15 क (2) का प्रकाशन किया गया है। जिसमें गोशाला की अधिशेष प्रश्नगत भूमि 96 एकड़ 89 डिसमल बिहार सरकार के द्वारा अर्जित होने का उल्लेख है।
इस प्रकार प्रश्नगत भूमि बिहार सरकार की है। अभिलेख में प्रतिवेदित है कि प्रश्नगत भूमि भू-दान, भू-हदबंदी, सेरात, देवस्थान, कब्रिस्तान, जल स्त्रोत, धोबी घाट, कुम्हार घाट आदि से मुक्त है तथा अतिक्रमण व न्यायिक विवाद से मुक्त है। अंचल अधिकारी गोराडीह, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता सदर एवं अनुमंडल पदाधिकारी, सदर के द्वारा प्रश्नगत भूमि पर इंडस्ट्रियल कारिडोर की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को निःशुल्क अन्तर्विभागीय भू-हस्तान्तरण की अनुशंसा की गई थी। |