deltin33 • 2026-1-22 08:56:44 • views 1245
जलमार्ग से दौड़ेगा व्यापार
डिजिटल डेस्क, पटना। अब बिहार में परिवहन का दायरा सिर्फ सड़क, रेल और हवाई मार्ग तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र की तर्ज पर बिहार में भी नदियों को ‘हाइवे’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि व्यापार और लॉजिस्टिक्स को सस्ता, सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।
जल परिवहन से खुलेगा नया विकल्प
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जलमार्ग विकास परियोजना पर फिलहाल काम जारी है। इसका उद्देश्य राज्य में माल ढुलाई के लिए एक वैकल्पिक और मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक परियोजना पूरी कर जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई की शुरुआत कर दी जाएगी। इससे प्रदेश के भीतर और बाहर जरूरी सामानों का आवागमन आसान होगा।
मंत्री ने किया जलमार्ग का निरीक्षण
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने हाल ही में गायघाट से दीघा घाट तक वाटर मेट्रो वेसल से सफर कर जल परिवहन और माल ढुलाई की संभावनाओं का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जलमार्ग, रेल और सड़क की तुलना में कहीं अधिक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम है। इससे ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण भी कम होगा।
बालू-सब्जी से लेकर भारी सामान तक ढुलाई
मंत्री ने बताया कि जलमार्ग के जरिए बालू, सब्जियां, अनाज और अन्य भारी सामानों की ढुलाई बेहद आसान हो सकती है। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों के किसानों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पटना-भागलपुर में पहले से सुविधा
वर्तमान में पटना और भागलपुर के बीच जलमार्ग की सुविधा उपलब्ध है, जहां रोपेक्स वेसल का निर्माण पहले ही किया जा चुका है।
इसके अलावा बक्सर, कालूघाट, हाजीपुर, मोकामा समेत अन्य शहरों के बीच भी जलमार्ग को बढ़ावा देने की योजना है। इन क्षेत्रों में नए सामुदायिक जेटी विकसित किए जाएंगे।
जेटी के साथ हाट, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा
प्रस्तावित जेटियों के पास स्थानीय हाट लगाने की भी योजना है। इससे ताजा फल-सब्जियां और स्थानीय उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेंगे। इससे न केवल किसानों और छोटे व्यापारियों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
जलवाहक योजना में बदलाव का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने जलवाहक योजना के तहत अनुदान पाने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर दूरी की शर्त को 300 किलोमीटर से घटाकर 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। इसके स्वीकृत होने से शिप संचालकों को योजना का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
सड़क-रेल का दबाव होगा कम
जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई शुरू होने से सड़क और रेल पर बढ़ता दबाव कम होगा। इससे परिवहन व्यवस्था अधिक संतुलित होगी और रखरखाव की लागत भी घटेगी। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
रोजगार और विकास की नई राह
कुल मिलाकर, जलमार्ग विकास से बिहार में व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। नदियों के रास्ते व्यापार की यह नई क्रांति राज्य के समग्र विकास को नई दिशा दे सकती है। |
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