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पुलिस पर की थी फायरिंग, तीन माओवादियों को 10-10 साल कारावास की सजा

LHC0088 1 hour(s) ago views 665
  

पुलिस पर गोलीबारी करने के मामले में माओवादी सामुएल हस्सा, चंबरा मुंडा और बिरसा बिरसा मुंडा को 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई है।



राज्य ब्यूरो, रांची। अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने पुलिस पर गोलीबारी करने के मामले में माओवादी सामुएल हस्सा, चंबरा मुंडा और बिरसा बिरसा मुंडा को बुधवार को 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने तीनों पर 42-42 हजार का जुर्माना लगाया गया है। नहीं देने पर अतिरिक्त जेल काटनी होगी। अदालत ने मामले में तीनों को मंगलवार को दोषी करार दिया था।

अदालत ने तीनों को आर्म्स एक्ट की चार धाराओं में एवं सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के आरोप में सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान भारी मात्रा में अवैध हथियार रखने का आरोप तीनों पर साबित हुआ था।

तीनों पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे। मामला नामकुम थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील कुमार तिवारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
सड़क निर्माण ठेकेदार से मांग रहे थे लेवी, तभी पहुंची पुलिस

आरोप है कि 11 जून 2022 को नामकुम के सोगोद गांव के दक्षिण-पूर्वी जंगल में जय माता दी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा ग्रामीण सड़क का निर्माण कराया जा रहा था। इसी दौरान तीनों उग्रवादी ठेकेदार से लेवी की मांग कर रहे थे।

सूचना मिलने पर पुलिस छापेमारी के लिए पहुंची, तभी उग्रवादियों ने पुलिस बल पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सामुएल हस्सा कमर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने पीछा कर तीनों माओवादियों को गिरफ्तार किया।

तलाशी के दौरान उनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों का बयान दर्ज कराया गया, जिसके आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपितों को दोषी ठहराया।
गुमला के तत्कालीन डीईओ की डिस्चार्ज याचिका खारिज

एसीबी की विशेष अदालत में रिश्वत मामले में आरोपित गुमला के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सुनील शेखर कुजूर और कंप्यूटर आपरेटर अनूप किंडो की डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका को बुधवार को खारिज कर दी। याचिका चार अगस्त को दाखिल की गई थी। मामला शिक्षिका कुंती देवी की शिकायत से जुड़ा है।

आरोप है कि 12 मई 2023 को गुमला जिले के माघी बालिका उच्च विद्यालय का निरीक्षण तत्कालीन डीईओ सुनील शेखर कुजूर ने किया था। इसके बाद नौ दिसंबर 2023 को सौंपे गए निरीक्षण प्रतिवेदन में शिक्षिका कुंती देवी पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।

कुंती देवी ने समय पर अपना जवाब भी दिया, लेकिन इसके बावजूद दोषमुक्त करने के एवज में उनसे एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की गई। इससे परेशान होकर शिक्षिका ने एसीबी से शिकायत की।

शिकायत का सत्यापन होने के बाद 18 जनवरी 2024 को एसीबी की टीम ने गुमला पहुंचकर डीईओ सुनील शेखर कुजूर और कंप्यूटर आपरेटर अनूप किंडो को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
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