सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, मैनपुरी। दीवानी न्यायालय के तत्कालीन प्रशासनिक लिपिक ने वित्तीय अनियमितता करते हुए वर्ष 2021 से लेकर दिसंबर 2025 तक 1.24 करोड़ का गबन कर लिया। गबन की धनराशि लिपिक द्वारा मृत मां, भा
और पत्नी के खातों में ट्रांसफर कर ली।
जिला न्यायाधीश के आदेश पर गठित लोक लेखा समिति ने जांच की तो गबन का राजफाश हो सका। सोमवार की देर रात प्रभारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने कोतवाली में मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने गबन के आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
लोक लेखा समिति की जांच में हुआ राजफाश, हिरासत में आरोपित
दीवानी न्यायालय में प्रभारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी देवव्रत राय चौधरी ने सोमवार की देर रात कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। बताया गया कि दीवानी न्यायालय के बिल विभाग में तैनात रहे अनूप कुमार यादव के खिलाफ सरकारी धनराशि को फर्जी तरीके से अपने स्वजन के खातों में ट्रांसफर करने की शिकायत के बाद लेखा परीक्षण कराया गया। लेखा परीक्षण में खुलासा हुआ कि मार्च 2021 से दिसंबर 2025 तक अनूप यादव ने 1,24,79152 रुपये की धनराशि की अपने पदीय दायित्वों का दुरुपयोग करके वित्तीय अनियमितता की है।
प्रभारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने कोतवाली में दर्ज कराई प्राथमिकी
यह जानकारी लेखा परीक्षा दल ने सात जनवरी को दी। इसके बाद जिला न्यायाधीश के आदेश पर गठित जांच कमेटी द्वारा कोषागार मैनपुरी कोषागार से रिपोर्ट प्राप्त की तो उसमें स्पष्ट हुआ कि अनूप कुमार द्वारा उक्त धनराशि अपने वेतन के अतिरिक्त निकाली गई है। जिसमें अनूप कुमार ने अपने बैंक खाते में और मां रामा देवी व पत्नी रीना देवी, भाई अभिषेक यादव के खाते में हस्तांतरित की गई है।
मां की मौत के बाद चलाता रहा खाता
रामा देवी की मृत्यु 30 दिसंबर 2019 में हो चुकी है, फिर भी अनूप इस खाते का संचालन कर धनराशि निकालता रहा। इस संबंध में पूर्व में भी धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। लेखा परीक्षण में 12479152 रुपये की धनराशि के घोटाले की पुष्टि हुई है। वहीं प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस ने अनूप को मंगलवार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एएसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। |
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