नई दिल्ली। हर साल मौजूदा केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाता है। केंद्रीय बजट पेश होने में बस कुछ ही दिनों का वक्त रह गया है। अक्सर हमारे मन में एक बार ये सवाल जरूर आया होगा कि कि आखिर ये बजट 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है। आइए आज इसके पीछे का कारण समझते हैं।
फरवरी के अंत में होता था बजट पेश
साल 2017 तक केंद्रीय बजट पहले फरवरी के अंत में पेश किया जाता था। ये अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा था। लेकिन साल 2017 के बाद ये परंपरा समाप्त की गई। सरकार ने ये फैसला लिया कि अब से बजट फरवरी की शुरुआत यानी 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा।
अब सवाल ये है कि इसे फरवरी के अंत से बदलकर फरवरी की शुरुआत में क्यों किया गया?
क्या है 1 फरवरी को ही बजट पेश करने की वजह
दरअसल बजट में घोषित होने वाली कई चीजें अप्रैल से लागू होती है। फरवरी के अंत में बजट लाने से इसे लागू होने में समय ज्यादा लग रहा था। इसलिए बजट पेश करने की तारीख फरवरी के अंत से 1 फरवरी में शिफ्ट क गई। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को बजट पेश करने की निर्णय लिया।
Budget 2026 Expectation: बड़ी उम्मीदों पर क्या होगा निर्णय?
1. क्या सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ेगी?
सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन की लिमिट कई सालों से नहीं बदली है, जबकि PF, PPF, ELSS और इंश्योरेंस प्रीमियम में इन्वेस्टमेंट की जरूरत बढ़ गई है। पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वाले टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में 80C की लिमिट बढ़ेगी। महंगाई को देखते हुए, 80C की लिमिट अब काफी कम लगती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को जारी रखना चाहती है, तो 80C जैसे मुख्य डिडक्शन को मजबूत करना जरूरी होगा।
2. बजट में म्यूचुअल फंड से टैक्स हटने की हो सकती है बड़ी घोषणा?
केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बीच, म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन AMFI ने वित्त मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेज दी हैं। AMFI का जोर इस बार मध्यमवर्गीय परिवारों की बचत बढ़ाने, टैक्स में राहत देने और रिटेल निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश (Long-term investment) के लिए प्रोत्साहित करने पर है।
अगर सरकार इन प्रस्तावों को मान लेती है, तो आपकी जेब पर इसका सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा। |
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