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त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का स्थापना दिवस: ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 60

हिमंत बिस्वा सरमा ने दी शुभकामनाएं, सांस्कृतिक विरासत को बताया ताकत  


  • आशीष सूद का संदेश: विविधता और प्रगति से चमकते रहें पूर्वोत्तर के राज्य
  • 21 जनवरी 1972: पूर्वोत्तर के तीन राज्यों को मिला पूर्ण राज्य का दर्जा
  • स्थापना दिवस पर गूंजा गर्व, आत्मसम्मान और विकास की यात्रा का प्रतीक
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत के तीन अहम राज्यों (त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर) को साल 1972 को भारतीय संघ में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था, जिसने पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ा।   




इस खास मौके पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर की जनता को शुभकामनाएं दीं।  
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर राज्यों को उनके राज्य स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। अपनी समृद्ध परंपराओं और मेहनती लोगों के साथ, ये सभी राज्य पूर्वोत्तर की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सद्भाव के साथ प्रगति करें, और उनकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान हमेशा फलती-फूलती रहे।"  




वहीं, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर के लोगों को स्थापना दिवस की बधाई दी।  
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "ये राज्य अपनी समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक विविधता और लोगों की आकांक्षाओं के साथ लगातार प्रगति करते रहें।"  
बता दें कि त्रिपुरा, मणिपुर, और मेघालय के राज्य बनने का सफर 1970 के दशक की शुरुआत में पूर्वोत्तर भारत के पुनर्गठन से जुड़ा है। आजादी के समय इस क्षेत्र में असम के मैदानी इलाके, पहाड़ी जिले, और मणिपुर व त्रिपुरा जैसी रियासतें शामिल थीं।  




मणिपुर और त्रिपुरा ने 1949 में भारत में विलय किया था। इसके बाद 1956 में इन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला, लेकिन दोनों राज्यों की लंबे समय से पूर्ण राज्य बनने की इच्छा थी, जो आखिरकार 21 जनवरी 1972 को पूरी हुई।  
मेघालय पहले असम का हिस्सा था। असम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 के जरिए इसे स्वायत्तता मिली और फिर 1972 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।  
इस पूरे परिवर्तन की संवैधानिक नींव संसद द्वारा पारित नॉर्थ ईस्टर्न एरियाज रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट, 1971 ने रखी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करना था। आज, यह दिन पूर्वोत्तर के इन तीनों राज्यों की पहचान, आत्मसम्मान और विकास की यात्रा का प्रतीक बन चुका है।






Deshbandhu




 Tripura Meghalaya ManipurHimanta Biswa Sarma










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