search
 Forgot password?
 Register now
search

AIIMS Rishikesh Scam: ढाई करोड़ रुपये की खरीदी स्वीपिंग मशीन, 24 घंटे चलने के बाद ही हांफ गई

Chikheang 1 hour(s) ago views 884
  

सांकेतिक तस्वीर।



सोबन सिंह गुसांई, जागरण देहरादून। उत्तराखंड को नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और लोगों को दिल्ली की दौड़ न लगानी पड़े, इस बात को ध्यान में रखते ही ऋषिकेश में एम्स का निर्माण प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाइ) के तहत किया गया था।

इसकी नींव दो फरवरी, 2004 को रखी गई। यह संस्थान 2012 में स्थापित हुआ और धीरे-धीरे ओपीडी व आइपीडी व अन्य सुविधाएं शुरू हुईं। लेकिन, समय के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की जगह एम्स ऋषिकेश का नाम घोटालों से ज्यादा जुड़ने लगा।

एम्स में हुए करोड़ों के घोटाले के संबंध में अब तक सीबीआइ चार मुकदमे दर्ज कर चुकी है। दो मुकदमों में एम्स के पूर्व निदेशक प्रोफेसर रविकांत का नाम भी शामिल है।

इनमें से दो मुकदमों में सीबीआइ ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, जबकि दो मुकदमों में अभी विवेचना जारी है।

संस्थान में वैसे तो सभी घोटाले ताक पर रखकर किए गए, लेकिन स्वीपिंग मशीन खरीद में जो घोटाला हुआ, उसने सभी को हैरत में डाल दिया। 2.40 करोड़ रुपये की लागत से एम्स निविदा मूल्यांकन समिति (टीईसी) ने वह मशीन खरीदी, जो छह माह पुरानी थी।

मशीन में अधिकतर पार्ट्स बदलकर नये लगाए गए। यह मशीन बिचौलिए महेंद्र उर्फ नन्हे ने विदेश से मंगवाई थी, जिसे तकनीक का कोई ज्ञान नहीं था। टेंडर की शर्तों अनुसार मशीन की पांच साल की गारंटी होनी चाहिए थी, लेकिन मशीन 24 घंटे चलने के बाद ही हांफ गई।

टेंडर से बाहर की गई मैसर्स यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड, कोलकाता व मेसर्स आयोटा इंजीनियरिंग कारपोरेशन, हरियाणा ने इसका विरोध किया और संस्थान से पत्राचार किया, लेकिन सभी ने चुप्पी साध ली।

मिलीभगत से आरोपितों ने वर्क आर्डर से पहले ही स्वीपिंग मशीन मंगवा ली थी। टेंडर जारी करने के बाद मशीन संस्थान में लाई गई।
अन्य खरीद टेंडरों में भी किया करोड़ों का घोटाला

एम्स में उपकरणों की खरीद घोटाले में सीबीआइ ने एक और मुकदमा अगस्त 2023 में दर्ज किया था। एम्स ऋषिकेश में उन्नत वेसल सीलिंग उपकरण की खरीद के लिए आठ जनवरी 2019 से 22 फरवरी 2019 के बीच टेंडर प्रक्रिया की गई थी।

जिसमें एम्स ऋषिकेश में कार्यरत माइक्रोबायोलाजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर बलराम जी ओमर को खरीद अधिकारी और समन्वयक नियुक्त किया गया था।

पूर्व में एम्स ऋषिकेश ने जो उपकरण 19 लाख 90 हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से क्रय किए थे, वही सात उन्नत वेसल सीलिंग 54 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से कुल तीन करोड़ 83 लाख रुपये में खरीदे।

जांच में यह भी पाया गया कि करोड़ों की लागत से खरीदे गए इन उपकरणों का उपयोग तीन वर्ष तक नहीं किया गया। इस खरीद में लगभग 6.57 करोड रुपये से अधिक का घोटाला किया गया।
कोरोनरी केयर यूनिट की स्थापना में 2.73 रुपये का घपला

एम्स में कोरोनरी केयर यूनिट की स्थापना में 2.73 करोड़ रुपये का घपला भी सामने आया था। पूर्व निदेशक डा. रविकांत ने तत्कालिक एडिशनल प्रोफेसर रेडिएशन ओंकोलाजी व तत्कालीन स्टोर कीपर के साथ मिलकर 2.73 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया।

ठेकेदार की मिलीभगत से हुए इस घोटाले की फाइलें तक गायब कर दी गईं। इस मामले में एंटी क्रप्शन ब्यूरो (एसीबी), सीबीआइ ने 26 सितंबर 2025 को एम्स के पूर्व निदेशक डा. रविकांत, तत्कालिक एडिशनल प्रोफेसर रेडिएशन ओंकोलाजी राजेश पसरीचा और तत्कालीन स्टोर कीपर रूप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

यह भी पढ़ें- Rishikesh AIIMS में मशीन व दवा खरीद घोटाला, CBI ने संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. रविकांत को भी बनाया आरोपित
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
155093

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com