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ट्रंप ने जारी किया अमेरिका का नया नक्शा। (सोशल मीडिया)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करके वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को बंदी बनाने और डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को किसी भी तरीके से अमेरिका का हिस्सा बनाने पर अड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दादागीरी पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। अब उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर जारी की है। इसमें अमेरिकी मानचित्र में उन्होंने ग्रीनलैंड को ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला और कनाडा को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया है।
ट्रंप के इस रुख से वैश्विक शेयर बाजार में हलचल मच गई है और भारतीय शेयर बाजार भी लुढ़क गए हैं। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप नाटो नेताओं के साथ अपने ओवल ऑफिस में बैठे दिख रहे हैं। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन और अन्य शामिल हैं।
एक अन्य पोस्ट में ट्रंप उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ ग्रीनलैंड में अमेरिकी झंडा फहराते हुए दिख रहे हैं। तस्वीर में एक मील का पत्थर लगा है जिस पर लिखा है, \“\“ग्रीनलैंड अमेरिकी क्षेत्र। स्थापित 2026।\“\“
गौरतलब है कि ट्रंप का यह रुख उनके पूर्व के बयानों से उलट है जिसमें उन्होंने मादुरो को बंदी बनाने के तुरंत बाद कहा था कि वेनेजुएला को अमेरिका तभी तक संभालेगा जब तक वहां एक सुरक्षित, उचित और समझदारी भरा बदलाव नहीं कर लेते।
कनाडा के संबंध में ट्रंप ने पिछले वर्ष सुझाव दिया था कि वह अमेरिका का 51वां राज्य बन जाए। लेकिन चुनाव जीतने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मई में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप के इस सुझाव को यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया था कि इच्छाओं और वास्तविकता के बीच फर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया था कि कनाडा कभी भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा।
मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ ग्रीनलैंड के बारे में टेलीफोन पर बातचीत की और कहा कि वह दावोस में कई पार्टियों से मिलेंगे। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अपने रुख को दोहराते हुए इसे अमेरिकी और दुनिया की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया। इससे पहले ट्रंप ने डेनमार्क और ब्रिटेन समेत दूसरे यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जब तक कि वे ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने के लिए सहमत नहीं हो जाते।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर कोई डील नहीं हुई तो एक फरवरी, 2026 से 10 प्रतिशत और एक जून, 2026 से 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ा दिए जाएंगे।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन ने मंगलवार को ग्रीनलैंड को लेकर प्रस्तावित नए अमेरिकी टैरिफ को \“\“लंबे समय से सहयोगी देशों के बीच एक गलती\“\“ बताया और ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक से इतर उन्होंने कहा कि ट्रंप ने पिछले वर्ष ईयू देशों पर और टैरिफ नहीं लगाने पर सहमति जताई थी।
लेयेन ने कहा कि जब दोस्त हाथ मिलाते हैं, तो इसका कुछ मतलब होना चाहिए। ट्रंप की धमकियों से पूरे यूरोप में आक्रोश और राजनयिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। यूरोपीय नेता संभावित पलटवार पर विचार कर रहे हैं, जिनमें जवाबी टैरिफ और यूरोपीय संघ का किसी जबरदस्ती के विरुद्ध उपायों का पहली बार उपयोग शामिल है।
ईयू के पास अमेरिका पर दबाव डालने के लिए तीन बड़े आर्थिक तरीके हैं- नए टैरिफ, अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते को निलंबित करना और ट्रेड बजूका (किसी जबरदस्ती के विरुद्ध उपायों का अनौपचारिक नाम)।
ट्रेड बजूका के तहत उन व्यक्तियों या संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है जो ईयू पर अनुचित दबाव डाल रहे हैं। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने सोमवार को एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि टैरिफ की धमकियों से उनका रुख नहीं बदलेगा। डेनमार्क की यूरोपीय मामलों की मंत्री मैरी बियरे ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों को बेहद अनुचित बताया।
उन्होंने कहा कि यूरोप को और भी मजबूत एवं अधिक स्वतंत्र बनने की जरूरत है। बियरे ने कहा, \“\“हम एक नई विश्व व्यवस्था के कगार पर हैं, जहां दुर्भाग्य से शक्तिशाली होना बहुत जरूरी हो गया है। हम देख रहे हैं कि अमेरिका यूरोप के प्रति बहुत ही घमंडी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।\“
बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं होने पर फ्रांसीसी वाइन पर 200 प्रतिशत टैरिफ की धमकी
ट्रंप की ओर से गाजा युद्ध समेत वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता के लिए शुरू की गई पहल \“बोर्ड ऑफ पीस\“ में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के शामिल होने से कथित इनकार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव किया है। अमेरिका फ्रेंच वाइन का सबसे बड़ा बाजार है और वर्तमान में इन पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगता है।
इस संबंध में पत्रकारों के सवालों पर ट्रंप ने कहा, \“\“कोई उन्हें नहीं चाहता क्योंकि वह बहुत जल्द पद से हटने वाले हैं। मैं उनकी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा और वह शामिल हो जाएंगे, लेकिन उन्हें शामिल होने की जरूरत नहीं है।\“\“
गौरतलब है कि मैक्रों का पांच वर्ष का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल मई, 2027 में खत्म होने वाला है और फ्रांसीसी कानून के अनुसार वह तीसरे कार्यकाल के लिए फिर चुनाव नहीं लड़ सकते। यही नहीं उन्होंने ट्रुथ सोशल पर मैक्रों के साथ अनौपचारिक वार्ता की चैट भी सार्वजनिक कर दी।
चैट के एक स्क्रीनशाट के अनुसार, मैक्रों ने विश्व आर्थिक मंच की बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति को जी-7 बैठक के लिए आमंत्रित किया। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और अमेरिका की सीरिया पर एकराय है और दोनों ईरान में अच्छी चीजें कर सकते हैं, लेकिन वह ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख को नहीं समझ पा रहे हैं।
स्क्रीनशाट में मैक्रों को ट्रंप का जवाब दिखाई नहीं दे रहा है, अगर उन्होंने दिया था। मैक्रों के करीबी एक अधिकारी ने पुष्टि की कि साझा किया गया मैसेज असली है। ट्रंप ने इस बात की भी पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रस्तावित गाजा बोर्ड आफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। ट्रंप ने उन्हें इस पहल के लिए चुने गए कई विश्व नेताओं में से एक बताया।
चागोस द्वीप समूह मारीशस को सौंपने के लिए ब्रिटेन की आलोचना की
डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मारीशस को सौंपने के ब्रिटेन की फैसले की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना व बॉम्बर बेस वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीपसमूह को छोड़ना मूर्खतापूर्ण का काम है। इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन और रूस ने इस कमजोरी पर ध्यान दिया है। यह दिखाता है कि उन्हें ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत क्यों है।
ब्रिटेन और मारीशस ने मई में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत दो शताब्दियों तक ब्रिटिश नियंत्रण में रहने के बाद चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मारीशस को दी जाएगी, हालांकि ब्रिटेन अमेरिकी बेस वाले डिएगो गार्सिया को कम से कम 99 वर्षों के लिए लीज पर ले लेगा।
अमेरिकी सरकार ने उस समय इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा था कि यह डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन की संयुक्त सैन्य सुविधा के दीर्घकालिक, स्थिर और प्रभावी संचालन को सुरक्षित करता है।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ) |
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