जिस डिलीवरी ब्वाॅय मुनेंद्र की दिलेरी की वाहवाही हो रही है, उसे ही गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने साढ़े चार घंटे नाॅलेज पार्क थाने में बैठाए रखा।
अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा। जिस डिलीवरी ब्वाॅय मुनेंद्र की दिलेरी की वाहवाही हो रही है, उसे ही गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने साढ़े चार घंटे नाॅलेज पार्क थाने में बैठाए रखा। यही नहीं पुलिस ने अपनी बात उसके मुंह से कहलवाने के लिए वीडियो बनाई। हर बार मुनेंद्र के मुंह से उनके मुताबिक शब्द नहीं निकले, तो फिर से वीडियो बनाई। तीन वीडियो बनाने के बाद पुलिस को अपने मन मुताबिक वीडियो मिल सकी।
थाने के बजाय एक पार्क में ले गए
दैनिक जागरण से बात करते हुए मुनेंद्र ने बताया कि सोमवार को पुलिस ने फोन कर बताया कि बड़े अधिकारी ने बात करने के लिए बुलाया है। दोपहर एक बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक उसे थाने के बाहर बैठाए रखा। सिपाही थाने के अंदर ले जाने के बजाए सामने एक पार्क में ले गए। इस दौरान वह घबरा भी गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
बार-बार बनवाया वीडियो
पुलिस वालों ने कहा कि एक वीडियो बनानी है, जिसमें कहना है कि पुलिस 15-20 मिनट में पहुंच गई। पुलिस ने बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए। मुनेंद्र ने कहा कि जो सच है वही कहेंगे, लेकिन सुनसान जगह पर पांच पुलिसवालों से घिरे होने कारण वीडियो बनाने पर सहमति दे दी।
वीडियो बनाते समय मुनेंद्र ने जब वह शब्द नहीं बोल सके, जो पुलिस ने कहे थे तो फिर से वीडियो बनाई गई। मंगलवार जांच को आई एसआईटी के सामने भी मीडिया कर्मियों ने यह मुद्दा एडीजी मेरठ भानु भास्कर के सामने उठाया तो उन्होंने इसकी भी जांच की बात कही।
योगी सरकार में सुरक्षा की नहीं चिंता
मुनेंद्र ने कहा कि वीडियो प्रसारित होने के बाद पुलिस और बिल्डर उन पर और परिवार पर दबाव बना रहा है। भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में वह और परिवार सुरक्षित है।
लोगों में रोष, डराएं नहीं मददगार को
मुनेंद्र पर दबाव बनाने से लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि अपनी जान की परवाह न कर
मदद करने वाले को परेशान करना सच को दबाना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट दिशा निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना में मददगार लोगों की सुरक्षा की जाए।
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