जागरण संवाददाता, लखनऊ। हाईकोर्ट परिसर में बिना पास व संगठित तरीके से अधिवक्ता के चैम्बर में दबिश डालने वाले तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ रजिस्ट्रार व अधिवक्ता की तरफ से विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। उधर, मामला जानकारी आने पर उन सभी को पुलिस उपायुक्त पश्चिमी विश्वजीत श्रीवास्तव ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त (चौक) को सौंपी गई है।
मामला 19 जनवरी 2026 का है। अधिवक्ता सज्जाद हुसैन ने आरोप लगाया कि दारोगा उस्मान खान, दारोगा लाखन सिंह व कांस्टेबल पुष्पेन्द्र सिंह, काकोरी थाने के मुकदमे की विवेचना के दौरान बिना विधिक अनुमति हाईकोर्ट परिसर में दाखिल हुए। आरोप है कि तीनों पुलिसकर्मी अनाधिकृत रूप से एडवोकेट चैम्बर संख्या सी-515, ब्लाक-सी में घुसे और अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी व उनके साथ आमिना खातून को पकड़ने का प्रयास किया।
आरोप है कि जब उन्होंने पुलिसकर्मियों को रोका तो उन्होंने धौंस जमाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इसके बाद उन्होंने तत्काल सुरक्षा रजिस्ट्रार हाईकोर्ट और हाईकोर्ट चौकी प्रभारी को सूचना दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षा कर्मियों ने तीनों पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट पुलिस चौकी के सिपुर्द कर दिया। निबंधक (सुरक्षा) द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए।
रजिस्टर और सीसी फुटेज देखने से स्पष्ट हुआ कि पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए एडवोकेट जनरल/सीएससी कार्यालय जाने का जो कारण बताया था, वह असत्य था। जांच में यह भी सामने आया कि जिस अपराध संख्या 320/25, थाना काकोरी से संबंधित मुकदमे का हवाला दिया गया, वह उस दिन न्यायालय में सूचीबद्ध ही नहीं था। सीसी फुटेज में तीनों पुलिसकर्मी चैम्बर संख्या सी-515 के पास देखे गए, जबकि प्रवेश पर्ची सीएससी कार्यालय जाने के लिए बनवाई गई थी।
इससे प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष निकाला गया कि पुलिसकर्मियों ने झूठा कारण दर्शाकर न्यायालय परिसर में अनाधिकृत प्रवेश किया और उसकी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने का गंभीर अपराध किया।
इस मामले में इंस्पेक्टर विभूतिखंड अमर सिंह ने बताया कि अधिवक्ता ने अपने चैम्बर में दाखिल होने का तो रजिस्ट्रार की तरफ से हाईकोर्ट की सुरक्षा में सेंध लगाने का आरोप लाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। फुटेज व अन्य माध्यम से मामले की जांच की जा रही है। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उधर, पुलिस उपायुक्त पश्चिमी का कहना है कि सहायक पुलिस आयुक्त (चौक) को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सौंपी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिसकर्मियों के इस कृत्य के पीछे क्या उद्देश्य था और इसमें और कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
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