दिल्ली सहित एनसीआर के अन्य शहरों की हवा जहरीली।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सहित एनसीआर के अन्य शहरों की हवा जहरीली बनी हुई है, लेकिन इसे लेकर न तो सरकारी विभाग गंभीर हैं और न ही प्रदूषण रोकथाम की निगरानी करने वाली एजेंसियां। प्रदूषण बढ़ने के कारण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) का दूसरी बार चौथा चरण लागू करना पड़ा।
इसके बावजूद निर्माण स्थलों और मलबा डालने वाले स्थलों की जांच नहीं हो रही है और न ही प्रदूषण से संबंधित शिकायतों का समाधान हो रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की निगरानी में भी यह बात सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकारें प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गंभीर नहीं हैं।
सीएक्यूएम ने दिसंबर से 2 जनवरी तक लागू ग्रेप के तीसरे और चौथे चरण के दौरान दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) तथा विभिन्न राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) के प्रदर्शन की समीक्षा की। समीक्षा में गंभीर कमियां उजागर हुईं। अधिकािरयों की लापरवाही के कारण इस समय फिर से ग्रेप का चौथा चरण लागू करना पड़ा है।
आयोग के कंट्रोल रूम के माध्यम से ग्रेप के इन चरणों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों की प्रतिदिन निगरानी की जा रही है। समीक्षा में पाया गया कि निर्धारित उपायों के क्रियान्वयन में विभिन्न शहरों में 7 प्रतिशत से लेकर 99.6 प्रतिशत तक की कमी रही। इंटरनेट मीडिया पर प्राप्त शिकायतों के निपटारे में भी लापरवाही बरती गई। 47 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक शिकायतें लंबित रहीं।
सीएक्यूएम ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को लंबित शिकायतों के तुरंत निपटारे के निर्देश दिए हैं। आयोग ने डीपीसीसी और एसपीसीबी को निर्देश दिया है कि ग्रेप के अंतर्गत प्रदूषण रोकथाम के लिए दिए गए निर्देशों का अनुपालन न करने वाले अधिकारियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाए।
निर्माण एवं विध्वंस स्थलों की जांच में लापरवाही
ग्रेप के तीसरे चरण में 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण एवं विध्वंस स्थलों की जांच में दिल्ली में 87 प्रतिशत, हरियाणा के एनसीआर शहरों में 99.6 प्रतिशत, राजस्थान के शहरों में 84 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के शहरों में 96 प्रतिशत की कमी। वहीं, ग्रेप के चौथे चरण में (24 दिसंबर तक) दिल्ली में 87 प्रतिशत, हरियाणा के शहरों में 100 प्रतिशत, राजस्थान में 79 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के शहरों में 97 प्रतिशत की कमी।
सड़कों की मशीन से सफाई पर ध्यान नहीं
सड़कों की मशीनी सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दिल्ली और हरियाणा के एनसीआर शहरों में 60-70 प्रतिशत तक की कमी रही।
शिकायतों का निपटारा नहीं हो रहा
ग्रेप के तीसरे चरण में दिल्ली में इंटरनेट मीडिया से प्राप्त 115 शिकायतों में से 47 प्रतिशत का समाधान नहीं हुआ। हरियाणा के एनसीआर शहरों में 57 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश के शहरों में 71 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा नहीं हुआ। वहीं, ग्रेप के चौथे चरण में दिल्ली में 68 प्रतिशत, हरियाणा के शहरों में 71 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के शहरों में 81 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा नहीं हुआ। राजस्थान के शहरों में दोनों चरणों में एक-एक शिकायतों का समाधान नहीं हुआ।
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