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भारतीय अर्थव्यवस्था कर रही लगातार तरक्की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक विश्लेषण के अनुसार, भारत इस दशक के आखिर तक चीन के साथ अपर मिडिल इनकम वाला देश बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। एसबीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की प्रति व्यक्ति ग्रॉस इनकम या GNI 4,000 डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।इससे यह चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ अपर मिडिल इनकम ग्रुप में आ जाएगा।
वर्ल्ड बैंक का डेटा देशों को प्रति व्यक्ति ग्रॉस नेशनल इनकम के हिसाब से क्लासिफाई करता है, वह दिखाता है कि 1990 और 2024 के बीच हाई-इनकम और अपर-मिडिल-इनकम वाली इकोनॉमी की संख्या में साफ बढ़ोतरी हुई है।
क्या कहता है विश्लेषण?
1990 में चीन का प्रति व्यक्ति GNI 330 डॉलर था और उसे कम आय वाले देश के रूप में क्लासिफाई किया गया था। 2024 तक वह अपर-मिडिल-इनकम वाले ग्रुप में पहुंच गया। इंडोनेशिया ने भी इसी तरह का रास्ता अपनाया है और इस टाइमफ्रेम के दौरान कम आय से अपर-मिडिल-इनकम वाला देश बन गया। इसी तरह अब भारत भी बहुत जल्द अपर-मिडिल-इनकम वाला देश बन जाएगा।
वर्ल्ड बैंक इकोनॉमी को चार इनकम कैटेगरी में बांटता है -
लोअर इनकम, लोअर-मिडिल इनकम, अपर-मिडिल इनकम और हाई इनकम। इसके लिए वह यूएस डॉलर में मापी गई प्रति व्यक्ति ग्रॉस नेशनल इनकम को मुख्य पैमाना मानता है।
1990 में जब वर्ल्ड बैंक ने 218 इकोनॉमी को क्लासिफाई किया तो 51 कम इनकम वाली कैटेगरी में थीं, 56 को लोअर-मिडिल-इनकम ग्रुप में रखा गया, 29 को अपर-मिडिल इनकम वाली इकोनॉमी बताया गया और 39 को हाई इनकम वाली कैटेगरी में रखा गया।
2024 तक यह डिस्ट्रीब्यूशन काफी बदल गया
कम इनकम वाले देशों की संख्या घटकर 26 हो गई है, जबकि 50 इकोनॉमी को लोअर-मिडिल इनकम कैटेगरी में रखा गया है। अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में 54 देश शामिल हो गए और ज्यादा इनकम वाली इकोनॉमी की संख्या दोगुनी से ज्यादा होकर 87 हो गई।
बड़ी इकोनॉमी में अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बना हुआ है, उसके बाद चीन का नंबर आता है। इस बीच, भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की राह पर है। दूसरी इकोनॉमी की तुलना में भारत का प्रति व्यक्ति इनकम के बेहतर लेवल तक पहुंचने का बदलाव ज्यादा धीरे-धीरे हुआ है।
जैसा कि SBI बताता है कि भारत को 2007 में कम इनकम से लोअर-मिडिल-इनकम कैटेगरी में आने में छह दशक लगे। 1962 में प्रति व्यक्ति GNI 90 डॉलर से बढ़कर 910 डॉलर हो गया, जो लगभग 5.3 प्रतिशत की सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट को दिखाता है।
2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी होगा भारत
भारत 60 साल बाद 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बना, अगले सात सालों में 2014 तक यह दोगुना होकर 2 ट्रिलियन डॉलर हो गया, 2021 तक इसमें एक और ट्रिलियन जुड़ गया, 2025 तक 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया और अनुमान है कि लगभग दो और सालों में यह 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
प्रति व्यक्ति इनकम 2009 में 1,000 डॉलर को पार कर गई, 2019 तक दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई और उम्मीद है कि 2026 में यह 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी।
SBI के बताए गए ताजा अनुमानों के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 4,000 डॉलर हो जाएगी और भारत अपर-मिडिल-इनकम कैटेगरी में शामिल हो जाएगा। SBI की रिपोर्ट में एक जरूरी बात बताई गई है कि पिछले दशक में भारत के प्रदर्शन से पता चलता है कि दुनिया भर में उसकी रिलेटिव ग्रोथ रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है।
एसबीआई का क्या कहना है?
SBI का कहना है, “अगर हम हाई इनकम वाले देश के लिए मौजूदा प्रति व्यक्ति GNI थ्रेशहोल्ड 13,936 डॉलर को 2047 तक पहुंचने का लक्ष्य मानते हैं (जैसा कि विकसित भारत विजन में है) तो भारत की प्रति व्यक्ति GNI को 7.5% की CAGR से बढ़ना होगा। यह मुमकिन लगता है क्योंकि पिछले 23 सालों (2001-2024) के दौरान भारत की प्रति व्यक्ति GNI 8.3% की CAGR से बढ़ी है।“
अगर हाई इनकम की सीमा बढ़कर लगभग 18,000 डॉलर हो जाती है तो भारत को 2047 तक उस कैटेगरी में पहुंचने के लिए अगले 23 सालों में प्रति व्यक्ति GNI ग्रोथ को लगभग 8.9 प्रतिशत की तेज गति से बनाए रखना होगा।
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