Punishment For Faking Own Death: उत्तराखंड के रानीखेत के एक मामले ने सभी को चौंका दिया है. दरअसल एक युवक ने अपना स्कूटर गहरी खाई में छोड़कर अपनी मौत का नाटक किया. 19 दिनों तक पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया. बाद में उसे दिल्ली में ट्रैक किया गया जहां पर वह अपनी पहली पत्नी और बच्चों के साथ रह रहा था. मकसद सीधा सा था कि वह अपनी दूसरी पत्नी से पीछा छुड़ाना चाहता था. इसी बीच एक सवाल खड़ा होता है कि क्या भारत में अपनी मौत का नाटक करने पर किसी व्यक्ति को सजा मिल सकती है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
क्या अपनी मौत का नाटक करना अपराध है
भारतीय कानून के तहत मौत करने का नाटक करना एक अलग अपराध के रूप में सूचीबद्ध नहीं है. हालांकि जैसे ही नकली मौत का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने, जिम्मेदारियों से बचने या फिर वित्तीय या भावनात्मक नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए तो इस पर गंभीर आपराधिक आरोप लगाते हैं. ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाती है.
धोखाधड़ी के लिए 3 से 7 साल की जेल
अगर कोई व्यक्ति दूसरे को गुमराह करने के लिए अपनी मौत का नाटक करता है तो उसे धोखाधड़ी माना जाता है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत धोखाधड़ी के लिए तीन से 7 साल तक की कैद और भारी जुर्माना हो सकता है. इस मामले में जीवनसाथी को यह विश्वास दिलाना कि उसके पति की मौत हो गई है, एक जानबूझकर किया गया धोखा माना जाता है.
न्याय में बाधा
अगर कोई व्यक्ति किसी अपराध की गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक कर रहा है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 262 के तहत 2 साल तक की जेल या फिर जुर्माना लग सकता है.
जालसाजी के मामले में

अगर कोई व्यक्ति फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा रहा है या फिर इस्तेमाल कर रहा है तो उसे जालसाजी माना जाता है. ऐसे मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत 3 से 7 साल तक की कैद हो सकती है. इस केस में बीएनएस की धारा 336 और 338 के तहत कार्यवाही की जाएगी.
इतना ही नहीं बल्कि अगर कोई व्यक्ति मौत का नाटक करके नई पहचान अपना लेता है तो यह भी बीएनएस की धारा 319 के तहत एक अपराध है. ऐसे मामले में 3 साल तक की जेल हो सकती है. इसी के साथ आपको बता दें की मौत का नाटक करने में मदद करने वाले को भी बीएनएस की धारा 249 के तहत 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है.
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