आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत की यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।
अमरेन्द्र तिवारी , मुजफ्फरपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत गणतंत्र दिवस पर बिहार प्रवास पर रहेंगे। इस विशेष अवसर पर वह उत्तर बिहार के प्रांत कार्यालय मधुकर निकेतन परिसर में झंडोत्तोलन करेंगे।
यह पहला अवसर होगा जब कोई सरसंघचालक गणतंत्र दिवस के दिन मुजफ्फरपुर आकर संघ कार्यालय में झंडोत्तोलन करेंगे। संघ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सरसंघचालक 25 जनवरी को सुबह शहर पहुंचेंगे। उसी दिन सामाजिक सद्भाव गोष्ठी सह संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे।
इस दौरान समाज परिवर्तन में सज्जन शक्ति की भूमिका पर उनका उद्बोधन होगा। कार्यक्रम में उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे।
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर सरसंघचालक सुबह मधुकर निकेतन परिसर में झंडोत्तोलन करेंगे। इसके बाद खंड से लेकर प्रांत स्तर तक के संघचालक के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद प्रस्थान करेंगे। उनके आगमन व कार्यक्रम को लेकर संघ कार्यालय परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संवाद कार्यक्रम के लिए स्थल चयन का कार्य भी जारी है।
पहली बार सरसंघचालक करेंगे यहां झंडोत्तोलन
बाल स्वयंसेवक के रूप में आरएसएस से जुड़े 75 वर्षीय अधिवक्ता गौरीशंकर प्रसाद उर्फ गौरी बाबू ने बताया कि बचपन से वे नियमित रूप से शाखा में जा रहे हैं।
जीवन के इस पड़ाव तक उन्होंने संगठन में कई दायित्वों का निर्वहन किया है। आरएसएस के दूसरे सरसंघचालक गुरुजी माधवराव सदाशिव गोलवलकर यहां आए थे। उनके बाद भी इस पद पर रहे लगभग सभी सरसंघचालक मुजफ्फरपुर आए हैं, लेकिन यह पहला अवसर है जब कोई सरसंघचालक इस विशिष्ट अवसर पर यहां झंडोत्तोलन कर संबोधन देंगे।
केदारनाथ रोड में संघ कार्यालय का हुआ था शुभारंभ
बताया कि आरएसएस का कार्यालय पहले केदारनाथ रोड में शुरू हुआ था। यह बात वर्ष 1960–65 के बीच की है। इसके बाद कार्यालय सूतापट्टी स्थित शीतला गली में स्थानांतरित हुआ और बाद में जायसवाल कंपाउंड, कलमबाग चौक के पास संचालित हुआ।
वर्ष 1995 में संघ कार्यालय के लिए अपनी जमीन मिली, जहां अब भवन बनाकर कार्यालय संचालित हो रहा है। अधिवक्ता ने बताया कि सरसंघचालक मोहन भागवत बिहार में सह-क्षेत्र प्रचारक व क्षेत्र प्रचारक के दायित्व में भी रह चुके हैं। उस दौरान उनका मुजफ्फरपुर में नियमित प्रवास होता रहा।
संघ प्रमुख के रूप में भी वे यहां आते रहे हैं। बाबा गरीबनाथ की पावन भूमि व स्वयंसेवकों से उनका विशेष लगाव है। उनके संबोधन से स्वयंसेवकों में नई ऊर्जा का संचार होता है। |
|